SC sought answers from the secretaries of the Center and both the governors, eight bills of Bengal-Kerala have not been approved for a year
नई दिल्ली। SC Notice to Centre बंगाल और केरल में विभिन्न विधेयकों को मंजूरी न देने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज केंद्र और राज्यपालों के सचिवों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दोनों राज्य सरकारों की अलग-अलग याचिकाओं पर राज्यपालों के सचिवों से विधेयकों को मंजूरी न देने और उन्हें राष्ट्रपति के विचारार्थ भेजने के खिलाफ जवाब मांगा है।
गृह मंत्रालय को भी नोटिस
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी परिदवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और दोनों राज्यपालों के सचिवों को नोटिस जारी किए हैं। केरल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने कहा कि वे विधेयकों को राष्ट्रपति के विचारार्थ भेजने के राज्यपाल के फैसले को चुनौती दे रहे हैं।
SC आते ही विधेयकों को राष्ट्रपति के पास भेज देते
इसी तरह, पश्चिम बंगाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी और जयदीप गुप्ता ने कहा कि जब भी मामला सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध होता है, राज्यपाल कार्यालय विधेयकों को राष्ट्रपति के पास भेज देता है।
CJI ने जारी किया नोटिस
सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़ ने राज्यों से कहा, उप राज्यपाल द्वारा बिल आरक्षित करने की शक्ति पर उठने वाले कुछ प्रश्न तैयार करें. केरल की ओर से वरिष्ठ वकील केके वेणुगोपाल ने कहा कि यह पहले ही किया जा चुका है. पश्चिम बंगाल की ओर से पेश वकील एएम सिंघवी ने कहा कि वह प्रश्न तैयार करने को वेणुगोपाल के साथ बैठने पर सहमत हैं. सीजेआई ने कहा कि गृह मंत्रालय के जरिए केंद्र को पक्षकार बनाने की छूट है. हालांकि, केरल के राज्यपाल कार्यालय को नोटिस जारी किया गया है और तीन हफ्ते में जवाब मांगा गया है.
8 महीने से विधेयक लंबित
पश्चिम बंगाल ने सुप्रीम कोर्ट में राज्य के उप राज्यपाल सीवी आनंद बोस के खिलाफ याचिका दायर की. जिसमें राज्य सरकार ने दावा किया कि जिन विधेयकों को राज्य सरकार ने पास कर दिया है, उपराज्यपाल उनको मंजूरी देने में देरी कर रहे हैं. न सिर्फ पश्चिम बंगाल बल्कि ऐसी ही एक याचिका केरल सरकार ने उपराज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के खिलाफ भी दायर की है. केरल सरकार का पक्ष रखने वाले वकील के के वेणुगोपाल ने कहा, बिल पिछले 8 महीने से रुके हुए हैं, उन्होंने कहा राज्य के उपराज्यपाल बिल को मंजूरी देने में देरी कर रहे हैं. यह संविधान के खिलाफ है.



