Collector’s initiative for local language conservation and administrative dialogue
कांकेर। स्थानीय भाषाओं और बोलियों का संरक्षण न केवल सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखने में सहायक होता है, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेष रूप से दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए स्थानीय भाषा का ज्ञान आवश्यक होता है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए, सुकमा कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने जिले में बहुलता से बोली जाने वाली गोंडी, धुरवी और हल्बी भाषाओं को सीखने हेतु प्रयास किए हैं।
कलेक्टर की पहल और स्थानीय भाषा की आवश्यकता
सुदूर अंचलों के विकास और प्रशासनिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने स्थानीय भाषाओं में पारंगत होने की आवश्यकता को प्राथमिकता दी। उन्होंने इन भाषाओं को सीखने हेतु पुस्तकों की मांग की, जिससे सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को जनसमुदाय के साथ सहज संवाद स्थापित करने में सहायता मिले।
अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ का योगदान
छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ, जिला सुकमा ने कलेक्टर की इस पहल का स्वागत किया और उन्हें गोंडी भाषा सीखने हेतु उपयुक्त पुस्तक उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इस क्रम में, सुप्रसिद्ध गोंडी साहित्य “कोयामर्री गोंडी पल्लो कार्रियाट” पुस्तक, जिसे तिरुमाल रामजी लाल वट्टी (बस्तरिया वट्टी दादी) द्वारा लिखा गया है, कलेक्टर को सप्रेम भेंट की गई।
कलेक्टर का विचार एवं समर्थन
कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने पुस्तक प्राप्त करते हुए आदिवासी भाषाओं, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और सुदूर अंचलों के समग्र विकास के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों को स्थानीय भाषाओं का ज्ञान आवश्यक है। इससे प्रशासनिक संवाद सुगम होगा और जनहितकारी योजनाओं का लाभ सही पात्रों तक पहुँचेगा।
स्थानीय भाषा संरक्षण का महत्त्व
स्थानीय भाषा का संरक्षण केवल प्रशासनिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक पहचान को भी बनाए रखने में मदद करता है। गोंडी, हल्बी और धुरवी जैसी भाषाओं का संरक्षण होने से उनकी पारंपरिक धरोहर, संस्कृति एवं सामाजिक मूल्यों की रक्षा होगी।
संघ का आभार एवं भविष्य की दिशा
छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ के जिला अध्यक्ष तिरुमाल कोमलदेव मरकाम के नेतृत्व में संघ के समस्त कर्मचारी साथियों ने स्थानीय भाषा सीखने की रुचि दिखाने पर कलेक्टर का आभार व्यक्त किया। संघ ने इस पहल को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को भी इस दिशा में कार्य करने हेतु प्रेरित किया।स्थानीय भाषाओं का ज्ञान प्रशासन और जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद करता है। सुकमा जिले में कलेक्टर द्वारा उठाया गया यह कदम दूरस्थ क्षेत्रों के विकास और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इस पहल से न केवल सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव होगा, बल्कि जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत भी संरक्षित रहेगी।



