Unnecessary expenditure is being incurred on the lines of recovery in making and paying DSC
पुसौर / चुने हुये नये सरपंचों को इन दिनों अपने पंचायतों मे हो रहे जरूरी खर्च के भुगतान के लिये डीएससी बनाने जनपद कार्यालय आना पड रहा है, जिसका षाखा, कार्यालय के पिछे है जहां प्रषिक्षण कार्य भी होता है। जानकारी के मुताविक 89 पंचायतों के सरपंच इसमें क्र्रमषः आते जा रहे हैं जिसमें उन्हें डीएससी बनाने के लिये 2000 रूप्ये खर्च वहन करना पड रहा है जो नगदी नहीं देने पर उनके खाते से कट जाने की बात कही जा रही है लेकिन डीएससी स्ट््रुमेंट नगद देने पर ही मिलता है। बताया जाता है कि रायगढ के किसी साई कम्प्युटर वाले को भी डीएससी बनाने के लिये अधिकृत किया गया है जो 1500रूप्ये लेता है और रसीद भी देता है। पिछले कुछ सालों से ही डीएससी भुगतान के जरिये पंचायत के विकास कार्यो का भुगतान हो रहा है जिसमें पुराने सचिवों को अपने पंचायत में भुगतान कराने के लिये जनपद में ही आकर माथापच्ची करना पडता है या तो फिर किसी जानकार सचिव या कम्प्युटर सेंटर से कराते हैं जिसमें उन्हें भुगतान कराने के एवज में षुल्क भी देना पडता है चूंकि ये चेक सिस्टम में भुगतान करने के अभ्यस्त रह चुके हैं और उन्हें तकनीकी जानकारी नहीं है। सरकार भुगतान को लेकर पारदर्षिता दिखाने के चक्कर में संबंधितों को जहा,ं यहां-वहां घुमना पड रहा है वहीं अनावष्यक खर्च के साथ साथ जानकार वसुली अभियान में लग गये हैं ऐसे स्थिति में चेक सिस्टम अथवा कोई अन्य मार्ग से भुगतान करने का मार्ग प्रषस्त करने की जरूरत है। सरपंचों का मानना है कि डीएससी बनाने के साथ ही भुगतान करने के बीच यदि संबंधितों को अनावष्यक भुगतान करने पडे तो निष्चित ही विकास कार्यो के लिये स्वीकृत की गई राषि में हेरफेर होगी तो इसका जिम्मेदार किसको माना जायेगा और डीएससी बनाने में हुये खर्च को हम केषबुक में कैसे दिखायेंगे ये सारे तथ्य बिते दिनांक को सरपंचों के बीच की आपसी चर्चा रही। इस संबंध में सीईओ अभिशेक बनर्जी के साथ मिलकर बात करने की कोषिष की गई लेकिन सफलता नहीं मिली।



