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भगवान नारायण के अलावा हमारे दुख को हरने वाला कोई नहीं,,, रमाकांत महाराज

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*प्रमोद अवस्थी मस्तूरी*

मस्तूरी।राठौर मोहल्ला मस्तूरी में राठौर परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन हरदी बाजार कोरबा के राष्ट्रीय भागवताचार्य श्री श्री रमाकांत महाराज ने ध्रुव चरित्र कथा का वर्णन किया। ध्रुव की कथा के माध्यम से श्रोताओं को भक्ति और दृढ़ संकल्प को विस्तार से समझाया। आचार्य ने कहा कि एक बार उत्तान पाद सिंहासन पर बैठे हुए थे। ध्रुव खेलते हुए राज के महल में पहुंच गए। उस समय उनकी अवस्था 5 वर्ष की थी।

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उत्तम राजा उत्तान पाद की गोदी में बैठा हुआ था। ध्रुव राजा की गोदी में चढ़ने का प्रयास करने लगे। सुरुचि को अपने सौभाग्य का इतना अभिमान था कि उसने ध्रुव को डांटा और कहा गोद में चढ़ने का तेरा अधिकार नहीं है। अगर इस गोद में चढ़ना है तो पहले भगवान का भजन करके इस शरीर का त्याग कर और फिर मेरे गर्भ से जन्म लेकर मेरा पुत्र बन। तब तू इस गोद में बैठने का अधिकारी होगा।

ध्रुव को अपनी सौतेली माता के इस व्यवहार पर बहुत क्रोध आया, पर वह कर ही क्या सकता था? इसलिए वह अपनी मां सुनीति के पास जाकर रोने लगा। सारी बातें जानने के बाद सुनीति ने कहा, ‘संपूर्ण सुखों को देने वाले *भगवान नारायण के अतिरिक्त तुम्हारे दुःख को दूर करने वाला और कोई नहीं* है। तू केवल उनकी भक्ति कर। भक्त ध्रुव भगवान नारायण के भक्ति में लीन होकर भगवान को प्रसन्न कर ही लिया।
पंडित रमाकांत महाराज ने समुद्र मंथन की कथा पर कहा कि देवासुर संग्राम में दैत्यों देवताओं को परास्त कर दिया वेद दुर्वासा मुनि के श्राप से लक्ष्मी रहित हो गए थे तब संपूर्ण देवता क्षीरसागर में शयन कर रहे भगवान इन राक्षसों से हमारी रक्षा कीजिए भगवान विष्णु ने कहा मंदराचल पर्वत को मथानी और वासकी नाग को नेती बनाकर मेरी सहायता से समुद्र का मंथन करो देवताओं मंथन किया समुद्र मंथन करने से अनेक प्रकार के रत्न प्राप्त हुआ साथ में विष मिले जिसे भोले भंडारी ने पान किया तब से भोले बाबा नीलकंठ के नाम से जाने लगे। सती एवं गजेंद्र मोक्ष तथा अन्य कथा सुनकर भक्तगण भाव विभोर होकर भजन में नाचने को मजबूर हो गए।
कथा के दौरान राठौर परिवार के सभी सदस्यों के साथ श्रोतागण भारी संख्या में उपस्थित रहे।

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