Managers are busy in compensating for the shortages in paddy procurement
पुसौर / पुसौर क्षेत्र के प्रायः सभी धान खरीदी केन्द्रों में भौतिक सत्यापन के बाद निष्चित ही षार्टेज तो आया है जिसे इस कार्य से जुडे अधिकारी व प्रबंधन द्वारा जिरो षार्टेज बताया जा रहा है जबकि वास्तव में हर धान खरीदी केन्द्रों में कमोबेष धान की कमी है। बिते दिनांक को सेवा सहकारी समिति बडेभंडार के प्रबंधक डिलेष्वर प्रधान द्वारा संचालित दो धान खरीदी केन्द्र बडेभंडार एवं बुनगा में धान खरीदी संपन्न होने व उसके उठाव होने के बाद दोनों केन्द्रों में 800-800 कट्टा धान कमी होने की खबर प्रकाष में आया है इसी तर्ज पर अन्य केन्द्रों में भी हो सकते हैं और सबसे ज्यादा केषला को बताया जा रहा है जिसके लिये जिला प्रषासन कार्यवाही करने का भी हवाला मिल रहा है। बताया जाता है कि किसी भी तरह जिरो षार्टेज करने कम दर पर धान तलाष की जा रही है ताकि उस कमी को पुरा किया जा सके। इसमें लोगों का मानना है कि डालवा धान कमाने वाले किसान से ही कम दर पर धान मिल सकता है। केन्द्रों से धान का उठाव समय पर होने पर तौल में ली जा रही धान की तेजी और सुख्ती के आधार पर धान में कमी नहीं आ सकता ऐसा जानकारों का मानना है लेकिन उठाव लेट होने और अधिक धुप, चुहों की मार आदि भी एक घटक है जिसे षासन स्तर पर विचारणीय है।



