There is a game going on in Ayushman card, hospital management is getting rich
पुसौर / षासन द्वारा खासकर गरीब तपके के लोगों को उचित चिकित्सा मुहैया कराने आयुश्मान कार्ड जारी किया गया है जिसका उपयोग वे बिमार होने की स्थिति में करते हैं जिसमें उनके आयुश्मान कार्ड को महिनों संबंधित स्वास्थ्य केन्द्र मे रखा जाता है और उसे फिर वापस किया जाता है। बताया जाता है कि प्रत्येक चिकित्सा में षासन द्वारा अलग अलग पेकेज जारी किया गया है कि उसमें यह तय होता है कि किस बिमारी के उपचार के लिये कितना राषि होगा। प्रायः ग्रामीण लोग सामान्य बुखार दुर्घटना अथवा बिमारी आदि में भी हास्पीटल में चिकित्सा कराने के बीच इसे उपयोग में लाते हैं ताकि नगदी खर्च से बच सकें। जानकारों एवं चिकित्सा सुविधा लिये लोगों के मुताविक आयुश्मान कार्ड का दुरूपयोग अषासकीय हास्पीटलों में हो रहा है और कहीं कहीं तो यह चल भी नहीं रहा है और जहां चल रहा है वहां मरीज को आयुश्मान कार्ड जमा करने के बाद भी जांच एवं बाहरी दवा आदि के लिये पैसा देना पडता है तो ऐसे स्थिति में जारी हुये आयुश्मान कार्ड का क्या फायदा। इस तथ्य की पुश्टी पुसौर क्षेत्र के दर्जनों ग्रामीणों ने करते रहे हैं और कई बार प्रमुखता से यह जानकारी सार्वजनिक हो चुकी है इसके बावजुद भी इस संबंध में किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं हुई है। आयुश्मान कार्ड को लेकर एक ग्रामीण ने बताया कि उसने पुसौर क्षेत्र के एक निजी हास्पीटल में आयुश्मान कार्ड के जरिये इलाज कराया जिसमें उसे डाक्टर की फीस के साथ, खुन जांच एवं दवा के पैसे देने पडे और सप्ताह भर से अधिक उसके आयुश्मान कार्ड को हास्पीटल प्रबंधन ने अपने पास यह कहकर रख लिया कि इलाज के बाकि पैसे लेने हैं और अभी साईड नहीं खुल रहा है जब खुलेगा और आयुश्मान कार्ड से पैसा कट जायेगा तो आपको आपका आयुश्मान कार्ड वापस हो जायेगा। अब संबंधित ग्रामीण मरीज को उक्त हास्पीटल मेें आराम नहीं मिला तो वो दुसरे हास्पीटल में जाना चाहा और अपने आयुश्मान कार्ड की मांग किया तो हास्पीटल प्रबंधन इलाज के पैसे जमा कर दो और अपना आयुश्मान कार्ड ले जाओं इस तरह की बात कही। ऐसे में अब ग्रामीण गरीब मरीज के सामने अंधेरा छा जाना लाजिमी है। यहां आम जानता को यह भी जानने योग्य है कि किस बिमारी से कितना राषि उसके आयुश्मान कार्ड से कटा कितना षेश है चूंकि षासन द्वारा एक निष्चित राषि ही इसमें नियत की गई होती है। लोगों का मानना है कि नगदी में जो इलाज 5000 रूप्ये का होता है वह आयुश्मान कार्ड में 15 से 20 हजार रूपये में होता है। बिते वर्श ऐसे एक खबर चली थी कि अपनी आयुश्मान कार्ड लाओ और हास्पीटल में एक दिन रूकने के बाद 10 हजार रूपये लेकर घर जाओ। इस तथ्य के पिछे रिजन ये था कि षासन द्वारा आयुश्मान कार्ड के जरिये लोगों को इलाज के लिये जो राषि जारी किया है वह लेप्स हो गया होता इसलिये समय सीमा में इसका उपयोग कर लिया जावे इसलिये कई लोग गैर जरूरी हास्पीटल में रहे और दोनों ने अपना अपना लाभ हासिल कर लिये। सरकार और सरकार के अंग को यह जानकारी है या नहीं यह तो पता नहीं लेकिन कम सुविधा और दक्ष डाक्टर नहीं होने के बावजुद निजी हास्पीटलें लगातार विकास की ओर हैं वहीं षासकीय हास्पीटलों में दक्ष डाक्टर के साथ यथासंभव सुविधा होने के बावजुद भी षासकीय हास्पीटलों मे मरीज की संख्या कम होने के साथ ही व्यवस्था दुरूस्त नहीं रहती। इस संबंध में खंड चिकित्सा अधिकारी डाॅ0 बी.के पटेल से संपर्क की गई जिसमें सफलता नहीं मिली।



