New path of development in Bijapur through Fundri bridge and education project: Deputy Chief Minister Vijay Sharma
बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने गुरुवार को बीजापुर जिले में दो महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों सड़क संपर्क और शिक्षा में ऐतिहासिक पहल की। उन्होंने पहले भैरमगढ़ विकासखंड के ग्राम फुंडरी में इंद्रावती नदी पर निर्माणाधीन उच्च स्तरीय पुल का निरीक्षण किया, और इसके बाद जिले के विभिन्न अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में 16 स्कूलों का लोकार्पण किया।
फुंडरी पुल से जुड़ेगा बीजापुर-नारायणपुर, 13,000 से अधिक ग्रामीणों को लाभ
फुंडरी पुल बीजापुर और नारायणपुर को जोड़ने वाला एक महत्त्वपूर्ण संपर्क मार्ग होगा, जिससे बांगोली, बैल, ताकिलोड़, मर्रामेटा, इतामपारा, डुंगा, थुरथली जैसे गांवों के 13,000 से अधिक ग्रामीणों को सीधा फायदा मिलेगा। उपमुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान निर्माण में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अब किसी भी कीमत पर देरी सहन नहीं की जाएगी।
शिक्षा का उजियारा फिर लौटा: 16 स्कूलों से जगी नई उम्मीद
उपमुख्यमंत्री ने जिला स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव के तहत एड़समेटा, तोड़का, नेंड्रा, कोरचोली जैसे अतिसंवेदनशील इलाकों में बंद पड़े स्कूलों को पुनः प्रारंभ किया और दो नए स्कूलों का भी उद्घाटन किया। उन्होंने बच्चों को ‘वेलकम किट’ देकर शिक्षा के प्रति उत्साहित किया और “दक्ष बीजापुर” अभियान के अंतर्गत मेधावी छात्रों को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की।
शिक्षा समाज को अंधकार से निकालने की असली मशाल है। शिक्षकों को दूर-दराज़ तक इस प्रकाश को पहुँचाना होगा, विजय शर्मा
नक्सलवाद पर दो टूक: विकास ही स्थायी जवाब
डिप्टी सीएम ने हाल की एक नक्सली हिंसा की घटना का उल्लेख करते हुए इसे अत्यंत अमानवीय बताया और कहा कि मासूमों की हत्या अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सुरक्षा बलों की संवेदनशीलता और संयम का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक जवान ने भालू के हमले के बावजूद आदेश के बिना गोली नहीं चलाई।
विकास और शिक्षा ही बस्तर का भविष्य
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर को केवल नक्शे पर नहीं, बल्कि विकास और आत्मनिर्भरता के मॉडल के रूप में स्थापित करने को प्रतिबद्ध है। फुंडरी पुल और स्कूलों की यह पहल सिर्फ संरचनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्जागरण का प्रारंभ है।
कार्यक्रमों में पुलिस, प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों और सैकड़ों ग्रामीणों की गरिमामयी उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि बस्तर अब डर से नहीं, उम्मीद से आगे बढ़ेगा।



