बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – जिले में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक और बड़ी सफलता मिली है। माड़ डिवीजन की कंपनी नंबर 01, प्लाटून नंबर 12 व 13 के ACM और अन्य विभिन्न पदों पर कार्यरत कुल 9 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें 6 पर कुल 24 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में बक्सू ओयाम माड़ डिविजन, कंपनी 01 पार्टी सदस्य, ₹8 लाख इनामी, बुधराम पोटाम – प्लाटून नंबर 12, ACM, ₹5 लाख इनामी हिड़मा ऊर्फ हिरिया – प्लाटून नंबर 13, ACM, ₹5 लाख इनामी, मंगू उईका – दक्षिण बस्तर टेक्निकल टीम सदस्य, ₹2 लाख इनामी, रोशन कारम – DGN डिविजन, चिन्नापल्ली एरिया कमेटी सदस्य, ₹2 लाख इनामी, मंगलो पोड़ियाम – भैरमगढ़ एरिया कमेटी पार्टी सदस्य, ₹2 लाख इनामी, कमलू हेमला – डीएकेएमएस सदस्य, बुधराम हेमला – डीएकेएमएस सदस्य, पंडरू पूनेम ऊर्फ पदखूटा – भूमकाल मिलिशिया कमांडर शासन की नवीन आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति और “नियत नेल्लानार योजना” से प्रेरित होकर माओवादियों ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। अंदरूनी क्षेत्रों में सुरक्षा कैंपों की स्थापना, सड़कों का निर्माण, बिजली, पानी, शिक्षा, और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं के विस्तार ने आत्मसमर्पण के निर्णय को प्रभावित किया। संगठन के भीतर बढ़ते आंतरिक मतभेद, विचारधाराओं से मोहभंग और भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना प्रमुख कारण रहे। आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि का चेक प्रदान किया गया। उन्हें पुनर्वास, रोजगार और शिक्षा संबंधी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। डीआरजी, एसटीएफ, जिला बल, कोबरा 201, 202, 210 बटालियन, केरिपु 85 व 199 बटालियन, बस्तर फाइटर एवं RFT ने इस समर्पण प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई। अब तक के आंकड़े 01 जनवरी 2025 से 310 माओवादी गिरफ्तार, 277 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, 131 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए, 01 जनवरी 2024 से 1013 गिरफ्तार, 466 आत्मसमर्पण, 189 मुठभेड़ों में ढेर, छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति ने नक्सलियों को हिंसा छोड़कर समाज में लौटने की नई दिशा दिखाई है। योजनाओं की सघन जानकारी, सामुदायिक पुलिसिंग और जन संवाद ने माओवादियों को यह विश्वास दिलाया कि शासन उनके पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है।
डॉ. जितेंद्र कुमार यादव, पुलिस अधीक्षक, बीजापुर ने माओवादियों से अपील की है कि वे छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण नीति का लाभ उठाएं, भ्रामक विचारधाराओं को छोड़ें और सामाजिक जीवन में निर्भय होकर लौटें। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वालों को न सिर्फ आर्थिक सहायता दी जा रही है, बल्कि समाज में पुनर्स्थापन की हर संभव सुविधा भी दी जा रही है।



