रायगढ़ । इस्पात और ऊर्जा के केंद्र के रूप में विख्यात रायगढ़ जिले में उद्योगों के आसपास के क्षेत्रों में विकास संबंधी कार्यों की उपेक्षा हो रही है , इससे स्थानीय निवासियों में निराशा और क्रोध की भावना घर करती जा रही है । आपको बता दें कि पहले उद्योगों को अपने आसपास के ग्रामों में विकास कार्यों की जिम्मेदारी दी जाती थी , बाद में शासन ने नीतिगत परिवर्तन करते हुए विकास कार्यों के लिए सी एस आर फंड के तहत प्रशासन के सुपुर्द कर दिया । परन्तु उद्योग प्रभावित क्षेत्रों के रहवासियों का कहना है कि पूर्व और वर्तमान दोनों ही स्थितियों में विकास संबंधी कार्यों की उपेक्षा हो रही है । ऐसा ही एक प्रकरण ग्राम देलारी का है जहां लंबे समय से ग्रामीण गांव के जर्जर माध्यमिक शाला के स्थान पर नए भवन की मांग कर रहे हैं पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है । माध्यमिक शाला भवन की स्थिति बहुत ही खराब है, छत से लगातार पानी टपकता है और छत को परतें उधड़ कर गिर रही हैं । फिर भी नौनिहाल ऐसी खतरनाक और जानलेवा स्थिति में पढ़ने को मजबूर हैं । मालूम हो कि हाल ही में देश के कई हिस्सों में ऐसे जर्जर विद्यालयों में पढ़नेवाले कई बच्चे भवन के ध्वस्त होने से जान गंवा चुके हैं । देलारी ग्राम के माध्यमिक शाला भवन की भी यही स्थिति है जो कभी भी अचानक से ध्वस्त हो सकता है । फिर भी शासन प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं है । इससे क्षुब्ध ग्रामीणों ने ग्राम सरपंच वीरेंद्र चौहान के नेतृत्व में जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर तत्काल सी एस आर मद से नए शाला भवन नियम की मांग रखी है । इस संबंध में ग्राम सभा से प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है। आपको बता दें कि देलारी ग्राम पंचायत क्षेत्र में उद्योगों की बहुलता है फिर भी विकास संबंधी कार्यों के लिए यहां के लोगों को तरसना पड़ रहा है।




