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ओडिशा की मुक्ता मेहर ने कथक नृत्य से बिखेरी सुर, ताल और भावों की अनूठी छटा

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Odisha’s Mukta Mehar spread the unique shade of melody, rhythm and expressions through Kathak dance

रायगढ़ / अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह के छठवें दिन ओडिशा के बरगढ़ जिले से आई 21 वर्षीय कथक नृत्यांगना मुक्ता मेहर ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुक्ता ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत भगवान शिव की स्तुति से की, जिसमें ताल और लय का सुंदर संगम देखने को मिला। इसके बाद उन्होंने रायगढ़ घराने के चुनिंदा बोल जैसे पक्षी परन और दरबदल परन प्रस्तुत किए। इसमें ताल की विविधता और लयकारी की अद्भुत छटा दिखाई दी। प्रस्तुति के अंतिम चरण में उन्होंने एक कजरी प्रस्तुत कर ऋतु और लोकभावना का सुंदर चित्रण किया, जिसे दर्शकों ने तालियों की गडग़ड़ाहट से सराहा।

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बता दे कि मुक्ता की कथक नृत्य सीखने की शुरुआत इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ से हुई। पिछले तीन वर्षों से मुक्ता अपने गुरु डॉ. जीतेश गडपाले से कथक की शिक्षा प्राप्त कर रही है और उनके मार्गदर्शन में कथक की बारीकियों को सिख रही है। मुक्ता ने कहा कि उन्हें चक्रधर समारोह जैसे प्रतिष्ठित मंच पर प्रस्तुति देने का अवसर पाकर गर्व और हर्ष की अनुभूति हो रही है।

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