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दुर्ग की देविका दीक्षित ने कथक में परंपरा और नवाचार का अनूठा संगम प्रस्तुत किया

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Devika Dixit of Durg presented a unique amalgamation of tradition and innovation in Kathak

रायगढ़ / चक्रधर समारोह 2025 के मंच पर दुर्ग की कथक नृत्यांगना देविका दीक्षित ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। लगभग चौबीस वर्षों से कथक साधना में रमीं देविका ने परंपरा और नवीनता का ऐसा संगम प्रस्तुत किया, जिसमें भाव, लय और ताल की उत्कृष्टता स्पष्ट झलकी। उनकी प्रस्तुति में कथक की गहराई के साथ आधुनिक दृष्टि का समावेश दिखाई दिया। दर्शकों ने इस प्रतिभाशाली कलाकार के समर्पण और साधना से सजी प्रस्तुति को तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा।

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देविका दीक्षित ने पाँच वर्ष की उम्र से ही नृत्य यात्रा की शुरुआत की और गुरु श्रीमती उपासना तिवारी एवं आचार्य पंडित कृष्ण मोहन मिश्र से प्रशिक्षण प्राप्त किया। कथक में ‘कोविद’ और ‘विशारद’ उपाधियाँ अर्जित करने के साथ उन्हें नेशनल नृत्य शिरोमणि पुरस्कार, श्रेष्ठ भारत सम्मान और गोपीकृष्ण नेशनल अवॉर्ड सहित कई राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। दिल्ली के कामानी ऑडिटोरियम से लेकर बनारस लिट फेस्ट तक उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन कर सराहना प्राप्त की है। नृत्य के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी देविका ने अपनी अलग पहचान बनाई है। लंदन यूनिवर्सिटी कॉलेज से अर्बन डिजाइन में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के बाद वे वर्तमान में आईआईएम, रायपुर से एमबीए की पढ़ाई कर रही हैं।

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