एसएसपी शशि मोहन सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साझा किए डिजिटल साक्ष्य, कहा गिरफ्तारी से जेल दाखिले तक कहीं नहीं हुई मारपीट
रायगढ़। थाना कोतरारोड के आबकारी प्रकरण में गिरफ्तार आरोपी संजय बघेल की न्यायिक हिरासत के दौरान हुई मृत्यु को लेकर उठे सवालों के बीच जिला पुलिस ने पहली बार विस्तृत रूप से अपना पक्ष सार्वजनिक किया है। सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल दस्तावेज और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जानकारी मीडिया के सामने रखी।
एसएसपी ने बताया कि संजय बघेल की मृत्यु के मामले की न्यायिक जांच जेएमएफसी रायगढ़ द्वारा की जा रही है और पुलिस जांच में पूर्ण सहयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि मृतक के परिजनों द्वारा थाना परिसर में मारपीट तथा अवैध रूप से रुपये लेने के लगाए गए आरोपों की भी गंभीरता से जांच की जा रही है।
मुखबिर सूचना पर हुई थी कार्रवाई
पुलिस के अनुसार 10 जून 2026 को सुबह लगभग 11 बजे मुखबिर से सूचना मिली थी कि अरसीपाली चौक के पास एक व्यक्ति अवैध कच्ची महुआ शराब के साथ मौजूद है। सूचना पर प्रधान आरक्षक श्यामदेव साहू एवं आरक्षक शंभू चौहान ने गवाहों के साथ मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की।
तलाशी के दौरान संजय बघेल के कब्जे से छह प्लास्टिक पन्नियों में भरी कुल 30 लीटर हाथ भट्टी निर्मित महुआ शराब बरामद की गई। आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए आरोपी को दोपहर 12:43 बजे थाना कोतरारोड लाया गया।
परिजनों को दी गई सूचना, 2:15 बजे हुई विधिवत गिरफ्तारी
थाना परिसर पहुंचने के बाद आरोपी को बंदीगृह के बाहर बैठाया गया तथा उसके परिजनों को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर उसका भाई अजय बघेल एवं अन्य परिजन थाना पहुंचे। आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोपहर 2:15 बजे आरोपी की विधिवत गिरफ्तारी दर्ज की गई और गिरफ्तारी की सूचना उसके भाई को दी गई।
सीसीटीवी फुटेज में दिखा सामान्य व्यवहार

प्रेस कॉन्फ्रेंस में साझा किए गए सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने दावा किया कि आरोपी के साथ पूरी प्रक्रिया के दौरान सामान्य और मानवीय व्यवहार किया गया।
फुटेज में दोपहर 2:21 बजे संजय बघेल को आराम करते हुए देखा जा सकता है। पुलिस के अनुसार पानी मांगने पर उसे पानी उपलब्ध कराया गया और अन्य आरोपियों की तरह भोजन भी कराया गया। इसी दौरान उसके परिजन थाना पहुंचे और वह बरामदे में बैठकर उनसे बातचीत करता हुआ भी दिखाई देता है।
मेडिकल परीक्षण में नहीं मिली चोट
शाम करीब 4:35 बजे आरोपी को मेडिकल परीक्षण, फिंगर प्रिंट प्रक्रिया और न्यायालय में पेशी के लिए थाना से रवाना किया गया। पुलिस के मुताबिक चिकित्सीय परीक्षण के दौरान संजय बघेल ने डॉक्टर को किसी प्रकार की चोट या शारीरिक प्रताड़ना की शिकायत नहीं की।
मेडिकल रिपोर्ट में उसे सामान्य एवं फिट बताया गया। वहीं उसी मामले के दूसरे आरोपी सुभाष पटेल ने स्वयं को उच्च रक्तचाप का मरीज बताया था।
जेल दाखिले के समय परिजन भी थे मौजूद
पुलिस के अनुसार शाम लगभग 6:30 बजे दोनों आरोपियों को जेल दाखिल कराया गया। उस समय संजय बघेल का रिश्तेदार राकेश बघेल भी मौजूद था, जिसने उससे मुलाकात कर जल्द जमानत कराने का भरोसा दिलाया था।
एसएसपी बोले मारपीट के आरोप फुटेज से प्रमाणित नहीं होते
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल परीक्षण और अन्य दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि शराब जब्ती कार्रवाई से लेकर जेल दाखिले तक आरोपी के साथ किसी प्रकार की मारपीट या अभद्र व्यवहार नहीं किया गया। थाना परिसर में मारपीट किए जाने के आरोप उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों से पुष्ट नहीं होते हैं।
रुपये लेने की शिकायत पर दो पुलिसकर्मी लाइन अटैच
हालांकि मृतक के परिजनों द्वारा कार्रवाई के दौरान रुपये लेने की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांचकर्ता प्रधान आरक्षक श्यामदेव साहू और आरक्षक शंभू चौहान को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया गया है।
इस शिकायत की विस्तृत जांच डीएसपी मुख्यालय द्वारा कराई जा रही है। एसएसपी ने कहा कि जांच निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से होगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं
मामले में प्राप्त पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए पुलिस ने बताया कि मृतक के शरीर पर पाए गए चोट के निशानों को मृत्यु का प्रत्यक्ष कारण नहीं माना गया है। मृत्यु के वास्तविक कारणों का निर्धारण करने के लिए हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच तथा विसरा परीक्षण की अनुशंसा की गई है।
न्यायिक जांच के निष्कर्षों का इंतजार
संजय बघेल की मौत का मामला फिलहाल न्यायिक जांच के अधीन है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मृत्यु के वास्तविक कारणों और अन्य आरोपों की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। जिला पुलिस ने न्यायिक जांच में हर संभव सहयोग देने और निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही है।



