Scientists of Krishi Vigyan Kendra Bijapur reached the farmers’ fields, gave information about pest management and crop protection
बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – कृषि विज्ञान केन्द्र बीजापुर के वैज्ञानिकों की टीम ने जिले के विभिन्न गांवों के किसानों के खेतों का भ्रमण किया। इस दौरान धान की फसल में पत्ती मोड़क कीट (चितरी कीट) एवं केस वार्म (बंकी कीट) का प्रकोप देखा गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि पत्ती मोड़क कीट इल्ली अवस्था में फसल को नुकसान पहुंचाती है। पूर्ण विकसित इल्ली हरे रंग की एवं 20-25 मि.मी. लंबी होती है, जो पत्तियों के दोनों किनारों को जोड़कर हरे पदार्थ को खुरजकर खा जाती है। इससे पत्तियों पर सफेद धारियां बन जाती हैं। वहीं, केस वार्म कीट की इल्ली हरे रंग की एवं 15-20 मि.मी. लंबी होती है, जो पत्तियों को काटकर खोल बना लेती है और अंदर रहते हुए पत्तियों का हरा भाग खाती है। किसानों को इन कीटों से बचाव हेतु इण्डोक्साकार्ब 15.80% ई.सी. 200 मि.ली. प्रति हेक्टेयर या कार्टाप हाइड्रोक्लोराईड 50 डब्ल्यू.पी. 1 किलो प्रति हेक्टेयर तथा केस वार्म नियंत्रण के लिए फेन्थोएट 50% ई.सी. 500 मि.ली. प्रति हेक्टेयर या क्विनालफॉस 25% 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई। धान में नत्रजन की कमी को दूर करने के लिए नैनो यूरिया का 2-4 मि.ली. प्रति लीटर पानी में छिड़काव करने की जानकारी दी गई। इसके अलावा खरपतवार प्रबंधन, सब्जी फसलों जैसे भिंडी, केला, बरबट्टी में कीट व रोग नियंत्रण तथा रबी फसलों में बीज उपचार के लाभ के बारे में किसानों को अवगत कराया गया। सब्जियों में जल निकास प्रबंधन पर भी विशेष जोर दिया गया।
भ्रमण के दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र के डॉ. दिनेश मराती, वैज्ञानिक अरुण सकनी एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

