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बरबट्टी और खीरा की खेती से आत्मनिर्भर बने बाह्मनपाली के किसान राज कुमार साहू

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Raj Kumar Sahu, a farmer from Brahmanpali, became self-reliant by cultivating Barbatti and Cucumber.

दो एकड़ में खेती से अर्जित किया 2.70 लाख रुपए का शुद्ध लाभ

Ro.No - 13672/156

रायगढ़ / कहते हैं, मेहनत, लगन और सही दिशा में किया गया प्रयास हर मुश्किल को आसान बना देता है। इसी बात को सच कर दिखाया है खरसिया विकासखंड के ग्राम बाह्मनपाली के प्रगतिशील किसान श्री राज कुमार साहू ने। उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बरबट्टी और खीरा जैसी नकदी फसलों को अपनाया और सीमित संसाधनों के बावजूद आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की। श्री साहू ने अपने खेत के एक एकड़ क्षेत्र में बरबट्टी की खेती की। उद्यान विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन, उन्नत बीज, संतुलित खाद और समय पर सिंचाई के कारण उन्हें प्रति एकड़ 100 क्विंटल का उत्पादन प्राप्त हुआ। बरबट्टी का बाजार मूल्य 35 रु. प्रति किलो रहा। प्रति एकड़ 2,00,000 रु. की लागत आने के बाद भी उन्होंने 1,50,000 रु. का शुद्ध लाभ कमाया।

बरबट्टी के साथ श्री साहू ने एक एकड़ में खीरा की भी खेती की। समय पर जैविक खाद और उचित सिंचाई व्यवस्था के कारण प्रति एकड़ 120 क्विंटल उत्पादन मिला। खीरा का बाजार मूल्य 20 रु. प्रति किलो रहा। लागत लगभग 1,00,000 रु. आने के बाद, उन्हें 1,20,000 रु.का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। बरबट्टी और खीरा दोनों फसलों से श्री साहू ने केवल दो एकड़ भूमि में 2,70,000 रु. का शुद्ध लाभ अर्जित किया। यह उनके दूरदर्शिता, परिश्रम और कृषि के प्रति समर्पण का परिणाम है। किसान श्री राज कुमार साहू का मानना है कि आज के समय में फसल विविधिकरण और उच्च मूल्य वाली फसलें अपनाना आवश्यक है। उनकी सफलता से प्रभावित होकर आसपास के किसान भी नकदी फसलों की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

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