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बहादुर सिंह व परिजनों के नाम अवैध रूप से चढ़ाई गई जमीन; तहसीलदार का आदेश निरस्त, सरकारी स्वामित्व बहाल

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Land illegally registered in the names of Bahadur Singh and his family; Tehsildar’s order revoked, government ownership restored

हड़पी सरकारी जमीन, एसडीएम कोर्ट ने छीनी वापस—2.46 एकड़ भूमि फिर दर्ज हुई नजूल

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रायगढ़। केलो विहार सहकारी संस्था को आवंटित भूमि पर बहादुर सिंह व उसके परिजनों द्वारा कब्जा कर अपने नाम दर्ज करवाने के मामले में एसडीएम न्यायालय ने बड़ा निर्णय दिया है। न्यायालय ने 2.46 एकड़ भूमि को पुनः शासकीय नजूल भूमि के रूप में दर्ज करने का आदेश देकर अवैध रूप से चढ़ाए गए नामों को हटाने की कार्यवाही की है। यह आदेश न केवल सरकारी भूमि को वापस स्थापित करता है, बल्कि उन मामलों के लिए भी उदाहरण बनेगा जिनमें निजी व्यक्तियों ने फर्जी अभिलेखों के माध्यम से भूमि पर कब्जा करने की कोशिश की है।

कैसे हड़पी गई सरकारी भूमि

14 मई 1991 को सरकार ने केलो विहार शासकीय कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था को कुल 25 एकड़ भूमि आवंटित की थी। इसी में छोटे अतरमुड़ा स्थित खसरा नंबर 3 की 2.46 एकड़ भूमि भी शामिल थी।समय के साथ बहादुर सिंह परिवार ने इस खसरे पर कब्जा किया और राजस्व अभिलेखों में अपने नाम दर्ज करवा लिए। जिन नामों को दर्ज किया गया उनमें शामिल हैं, स्व. बहादुर सिंह, समुंद बाई, माधुरी सिंह, राजेंद्र सिंह ठाकुर, संतोषी सिंह, शंकर सिंह राजपूत, पूर्णिमा सिंह, सरस्वती सिंह, अंकिता सिंह। तत्कालीन तहसीलदार द्वारा इन सभी के नाम चढ़ाए गए थे।

सिविल कोर्ट ने भी किया था दावों को खारिज

बहादुर सिंह द्वारा सिविल कोर्ट में मालिकाना हक का दावा किया गया था, परंतु अदालत ने उसका वाद निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद तत्कालीन तहसीलदार ने गलत व्याख्या करते हुए भूमि को बहादुर सिंह के वारिसों के नाम पर दर्ज कर दिया।

एसडीएम कोर्ट में दस्तावेजी सच उजागर

अपीलकर्ताओं द्वारा पेश किए गए ऐतिहासिक राजस्व दस्तावेजों, जिसमें वर्ष 1951 के रिकॉर्ड और डिप्टी कमिश्नर लैंड रिफॉर्म के दस्तावेज भी शामिल थे, से स्पष्ट हुआ कि भूमि मूलतः नजूल थी।सरकारी रिकॉर्ड में इसे नजूल के रूप में ही दर्ज किया गया था। बहादुर सिंह के पिता के हस्ताक्षर भी अभिलेखों में मौजूद थे।

एसडीएम का निर्णय

14 जून 2024 को एसडीएम न्यायालय ने तत्कालीन तहसीलदार का आदेश अवैध बताते हुए निरस्त किया तथा निर्देश दिया कि खसरा नंबर 3, रकबा 2.46 एकड़ को तत्काल प्रभाव से शासकीय नजूल भूमि के रूप में दर्ज किया जाए। गलत तरीके से दर्ज सभी नाम हटाए जाएं।

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