The five-day training program on Koya Punem and constitutional rights has commenced in Bada Jamhari, Karangal Pargana area.
पांच दिवसीय प्रशिक्षण 15 से19 जनवरी तक जारी रहेगा
नारायणपुर– जिला मुख्यालय से लगभग15किलोमीटर दूर पर करंगाल परगना क्षेत्र के अंतर्गत लगभग 60 गाँव के प्रति घर चुल्हा चन्दा 100 रुपये ,1 सोली चावल के सहयोग से बड़े जम्हरी में कोया पुनेम एवं संवैधानिक प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण शिविर में बस्तर संभाग क्षेत्र से युवा एवं युवतियाँ लगभग 1000 प्रशिक्षणर्थी भाग ले रहे हैं, जिनका उद्देश्य आदिवासी समाज को उनकी परंपरागत जीवनशैली, प्रकृति आधारित संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना है।
पांच दिवसीय इस प्रशिक्षण शिविर में पेसा कानून, वन अधिकार मान्यता कानून, संवैधानिक अधिकार, ग्रामसभा सशक्तिकरण, आरक्षण व्यवस्था, आदिवासी स्वशासन प्रणाली, गोंडवाना के वैज्ञानिक सिद्धांत, कोयतोरियन तकनीक, हम्म पुंजम, नारी व्यवस्था, टोटेमिक सिस्टम, लिंगो पेन परंपरा, गोंड विशेष – पेसा दिवस कोया पुनेम एवं संवैधानिक गया है और यथासंभव अपने पांच दिवसीय परगना स्तरीय प्रशिक्षण शिविर करसना तकनीक सहित आदिवासी समाज की सदियों पुरानी परंपराओं का सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। समाज के विभिन्न हिस्सों से आए विषय विशेषज्ञ, समाज प्रमुख, बुद्धिजीवी, गोंडी पुजारी, सिरमेटी एवं गायक-वादक प्रशिक्षणार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।
पारंपरिक सफेद पगड़ी एवं सफेद स्कार्फ पहनना अनिवार्य किया पारंपरिक वेशभूषा व वाद्ययंत्र को अपनाने का आग्रह किया गया है। प्रशिक्षण स्थल पर पॉलीथिन एवं प्लास्टिक से बनी सामग्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। शिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्रतिदिन होने वाले सभी सत्रों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहना होगा। भोजन, नाश्ता, स्नान और विश्राम जैसे अवकाश सत्रों में भी पारंपरिक आदिम जीवनशैली को व्यावहारिक रूप से समझाने का प्रयास किया जा रहा है।
ततपश्चात जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नारायण मरकाम जी कार्यक्रम स्थल पहुँचकर कहा-हमारे आदिवासी समाज के नीति-नियम और परम्परागत व्यवस्था को बचाकर रखना है।आदिकाल से गांव मे शादी,छट्टी,त्यौहारो को सामाजिक व्यवस्था से मनाते आ रहे हैं।समाज को आगे बढ़ाने के लिए युवा -युवतियों को सामाजिक, आर्थिक, एवं पढ़ाई पर भी विशेष ध्यान देना है।आप सभी यह प्रशिक्षण में सीख कर अपने-अपने गांव में लागू करना ताकि आने वाली युवा पीढ़ी भी परम्परा को देखकर व्यवस्थित रखेंगे।
इस अवसर पर श्री संतनाथ उसेंडी,जिला पंचायत सदस्य, श्री सुकमन कचलाम, चैतराम कमेटी,गागरु राम सलाम,अभिलाल शोरी,लखन मंडावी,रामसाय दुग्गा,सहित ग्रामवासी उपस्थित थे।



