मस्तुरी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गोड़ाडीह में स्थित जिंदल फाउंडेशन द्वारा लोहरसी में C.S.R योजना के तहत बनाए गए सी सी ( सीमेंट कंक्रीट ) सड़क इन दिनों काफी चर्चा का विषय बना है , सूचना पटल में लिखे अनुसार यह सड़क लोहर्सी के झिलमिलिया तालाब से धान मंडी तक कुल लम्बाई 416 मीटर बनाया गया है। लेकिन वास्तव में रोड आधा अधूरा बनाया गया । इस सड़क को बनाने में जो लापरवाही बरती है वो किसी भ्रष्टाचार से कम नहीं है , इस सड़क की मोटाई तो कही कही पर 6 इंच भी नहीं है ना ही इस पर ब्रश फिनिशिंग बनाई है, जिसके कारण से सड़क को फिसलन मुक्त बनाता है जिसे ( स्किड रेसिस्टेंट ) कहते है। ना ही इस पर ज्वाइंट कटिंग किया जो की बहुत ही अनिवार्य होता सड़क के ऊपर जो जानबूझकर कट्स लगाए जाते ( एक्सपेंशन ज्वाइंट्स ) कहते है , जो सड़क को गर्मी के दिनों मे फटने से बचाते है। इस सभी कमियों को देखकर जिंदल कंपनी के अधिकारी और ठेकेदार की लापरवाही कहे, या मनमानी, ये तो कह नहीं सकते क्योंकि यह एक सोच समझकर किया निर्माण कार्य है इसे साफ तौर पर भ्रष्टाचार ही कह सकते है ।
*क्या कोई बड़ा घोटाला किया गया है काम के नाम पर ?*
सवाल खड़ा हो रहा है कि लागत मूल्य बताने के लिए क्यों ठेकेदार बात को घुमा रहे है क्या ठेकेदार द्वारा फ्री में काम किया है रोड के लिए या फिर कोई बड़ा रकम लिया गया है काम के लिए जिसके कारण लागत मूल्य न तो सूचना बोर्ड पर दर्शाया गया है और न ही पूछने पर ठेकेदार द्वारा बताया जा रहा है और न ही जिंदल कंपनी के इंचार्ज बनकर बैठे लोग। क्या काम के लिए बड़ी रकम निकाला गया है और काम के नाम पर लीपा पोती किया गया जिसको छुपाया जा रहा है?
*सड़क से लेकर परियोजना सूचना बोर्ड भी भ्रष्टाचार का भेट चढ़ गया*
किसी भी कार्य या परियोजना की जानकारी देने वाले बोर्ड को आमतौर पर सूचना पट्ट या परियोजना सूचना बोर्ड ( साईनबोर्ड ) लगाया जाता है जिसमें कार्य का नाम, स्वीकृति राशि, कार्य शुरू और समाप्त होने की तिथि , शिकायत नम्बर, कार्य एजेंसी का नाम, तमाम जानकारियां होनी चाहिए थी लेकिन कई जानकारी को विलुप्त कर दिया गया है। यह बोर्ड पारदर्शिता बनाए रखने और आम जनता को कार्य की गुणवत्ता, वा प्रगति की जानकारी देने के लिए अनिवार्य होता है।
जब हमने रोड निर्माण करने वाले ठेकेदार से जानकारी ली तो उसने जानकारी ही नही बताई बात को बस घुमाया जा रहा था लागत मूल्य के बारे में भी पूछा गया तो उन्होंने जानकारी नही दी।
जब हमने जिंदल कम्पनी के अधिकारी से बात की तो उनके द्वारा बोला गया जिंदल कंपनी जिस रोड चाहे वो बना सकती है किसी को उसके बारे में बताने की जरूरत नही।
*सवालिया निशान खड़ा होते हुए ?*
क्या जिदंल फाउंडेशन अपने सी एस आर मद के पैसे से इस प्रकार का घटिया निर्माण कराता है?
क्या जिंदल फाउंडेशन के अधिकारी जान बूझ कर घटिया निर्माण को अनदेखा कर रहे है या फिर जिन्दल के अधिकारी के मिली भगत से ऐसा घटिया काम हो रहा है ?
या फिर ठेकेदार के साथ मिलकर कोई पूछने वाला नही करके जिंदल फाउंडेशन के सी एस आर मद के पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है ?



