मस्तूरी। क्षेत्र के मल्हार में 11 केवी हाईटेंशन बिजली लाइन की ओवर क्रॉसिंग और रखरखाव को लेकर ग्रामीणों, किसानों एवं जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। कई स्थानों पर एक ही जगह पर 11 केवी के तीन-तीन एक्सटेंशन क्रॉस किए गए हैं, वहीं कई जगह हाईटेंशन तार नीचे लटकते और आपस में उलझे हुए दिखाई दे रहे हैं, जिससे कभी भी बड़ी दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है।
विशेष रूप से ग्राम चकरबेडहा में आकाश बंजारे के घर के पीछे तीन 11 केवी हाईटेंशन तारों की ओवर क्रॉसिंग की गई है। ग्रामीण इसे बिजली विभाग की गंभीर लापरवाही बता रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि किसी निजी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए अधिकारियों द्वारा इस प्रकार का जोखिम भरा कार्य कराया गया है। आबादी क्षेत्र के पास इस तरह की व्यवस्था को अत्यंत खतरनाक बताया जा रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि अधिकारी प्रवीण कौशिक के निर्देशन में लाइनमैन और फ्यूज कॉल कर्मचारियों से बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के खंभों पर कार्य कराया जाता है। सेफ्टी बेल्ट, ग्लव्स और अन्य विद्युत सुरक्षा उपकरणों की कमी के बावजूद कर्मचारियों से काम कराया जा रहा है, जिससे उनकी जान भी जोखिम में है।
मल्हार सब स्टेशन से 5 फीडरों को होती है बिजली सप्लाई
*मल्हार सब स्टेशन से क्षेत्र के विभिन्न गांवों को पांच फीडरों के माध्यम से बिजली आपूर्ति की जाती है।*
1. सरसेनी फीडर – बकरकुदा, पत्थरताल, सरसेनी, मटिया, विद्याडीह, कुटेला, ठाकुरदेवा, खपरी, बिनैका सहित कुल 9 गांव।
2. जवाहर नवोदय विद्यालय फीडर – केवल नवोदय विद्यालय के लिए आरक्षित।
3. ग्रामीण फीडर – बुढीखार, बेल्हापार, थेम्हापार, जैतपुर, नवागांव, बैटरी सहित 6 गांव।
4. मल्हार फीडर – नगर पंचायत मल्हार के लिए आरक्षित।
5. नेवारी फीडर – चकरबेडहा, वृन्दावन, डंगनिया, पकरिया, धनगवां, नेवारी, जुनवानी सहित 7 गांव।
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*ग्रामीण फीडर पर बढ़ाया गया अतिरिक्त भार*
बताया जा रहा है कि नेवारी फीडर के अंतर्गत आने वाले सात गांवों में से पांच गांव — चकरबेडहा, वृन्दावन, डंगनिया, पकरिया और धनगवां — को ग्रामीण फीडर से जोड़ दिया गया है। पहले से ग्रामीण फीडर में छह गांव जुड़े थे, अब अतिरिक्त पांच गांव जोड़ दिए जाने से कुल 11 गांवों का भार एक ही फीडर पर आ गया है। इससे किसानों और ग्रामीणों की बिजली संबंधी समस्याएं और बढ़ गई हैं।
*क्या हो सकते हैं नुकसान*
इस व्यवस्था के कारण बिजली फाल्ट होने पर कर्मचारियों को खराबी ढूंढने में दिक्कत होगी। हाईटेंशन तारों की क्रॉसिंग से मरम्मत कार्य के दौरान कर्मचारियों के लिए भी खतरा बढ़ जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पहले से ही लो वोल्टेज, तूफान और बारिश के समय बिजली कटौती जैसी समस्याएं बनी रहती हैं। अब अतिरिक्त लोड के कारण कंट्रोल ऑफिस के पैनल बोर्ड पर दबाव बढ़ेगा, जिससे तकनीकी खराबियां और बढ़ने की आशंका है। इसका सबसे ज्यादा असर खेती करने वाले किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
*नियम क्या कहते हैं*
विद्युत सुरक्षा मानकों तथा भारतीय विद्युत नियम और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) के सुरक्षा प्रावधानों के अनुसार 11 केवी हाईटेंशन लाइनों को एक ही स्थान पर इस प्रकार क्रॉस कराना सामान्यतः उचित नहीं माना जाता, विशेषकर आबादी क्षेत्र में। ऐसी स्थिति में पर्याप्त ऊंचाई, सुरक्षित दूरी, इंसुलेशन और अन्य तकनीकी सुरक्षा प्रावधान अनिवार्य होते हैं। इन मानकों का पालन नहीं होने पर गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
*जांच और सुधार की मांग*
ग्रामीणों ने बिजली विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द तकनीकी जांच कराकर लाइन को सुरक्षित तरीके से व्यवस्थित किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा और किसी भी संभावित दुर्घटना की जिम्मेदारी विभाग की होगी।
*क्या कहते हैं अधिकारी*
कनिष्ठ यंत्री निलेश तोप्पों (मल्हार) ने बताया कि ग्रामीणों की मांग और उच्च अधिकारियों के निर्देश पर कार्य हुआ होगा। उन्होंने कहा कि वह हाल ही में मल्हार विद्युत कार्यालय में पदस्थ हुए हैं, इसलिए क्रॉसिंग से संबंधित विस्तृत जानकारी उन्हें नहीं है।
वहीं सहायक यंत्री प्रवीण कौशिक का कहना है कि 11 केवी लाइन की क्रॉसिंग तकनीकी रूप से संभव है, लेकिन इसमें पोल की ऊंचाई और अन्य मानकों का पालन जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि समय के अभाव के कारण अभी विस्तृत जानकारी नहीं दे पा रहे हैं, जानकारी लेकर आगे बताया जाएगा।



