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लोरमी में अवैध शराब का खेल बेनकाब: छापेमारी में बड़े पैमाने पर महुआ लाहन जब्त, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

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मुंगेली-लोरमी/- जिले के लोरमी क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार एक बार फिर खुलकर सामने आया है। आबकारी विभाग की ताजा छापेमार कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि क्षेत्र में अवैध मदिरा का धंधा लंबे समय से फल-फूल रहा था और जिम्मेदार विभाग समय रहते इसे रोकने में नाकाम रहा है। अब कार्रवाई जरूर हो रही है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर यह कारोबार कब से और किसके संरक्षण में चल रहा था?
कलेक्टर कुन्दन कुमार के निर्देश पर चल रही कार्रवाई के तहत आबकारी टीम ने चिल्फी थाना क्षेत्र के ग्राम साल्हेघोरी में दबिश दी, जहां से लीला बाई भास्कर के कब्जे से करीब 75 किलोग्राम महुआ लाहन बरामद किया गया। यह मात्रा इस बात की ओर इशारा करती है कि गांव में अवैध शराब बनाने का काम कोई छोटा-मोटा नहीं, बल्कि संगठित स्तर पर चल रहा था। बावजूद इसके, स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की आंखें अब तक क्यों बंद रहीं, यह बड़ा सवाल खड़ा करता है।
इसी तरह दूसरी कार्रवाई में चौकी डिंडोरी थाना क्षेत्र के ग्राम झलरी निवासी छेदी सिंह साकत के पास से 10 लीटर हाथ भट्ठी से बनी महुआ शराब और 75 किलोग्राम महुआ लाहन जब्त किया गया। आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम 1915 की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। लेकिन इस कार्रवाई ने यह भी उजागर कर दिया है कि क्षेत्र में अवैध शराब का नेटवर्क कितना गहरा है।

👉कार्रवाई पर उठते सवाल,
स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध शराब का कारोबार कोई नया नहीं है। गांव-गांव में खुलेआम महुआ शराब बनाई और बेची जाती है, जिससे युवाओं और गरीब वर्ग पर बुरा असर पड़ रहा है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से समय-समय पर केवल औपचारिक कार्रवाई ही होती रही है। जब-तब छापेमारी कर कुछ लोगों को पकड़ लेना और फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल देना, यही सिलसिला वर्षों से चलता आ रहा है।

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👉क्या सिर्फ दिखावा है कार्रवाई?,
इस ताजा कार्रवाई को लेकर यह भी चर्चा है कि क्या यह केवल “दिखावे की सख्ती” है या वास्तव में अवैध शराब माफिया पर शिकंजा कसने की गंभीर कोशिश? क्योंकि यदि विभाग ईमानदारी से काम करे, तो इस तरह के अवैध धंधे का जड़ से खत्म होना मुश्किल नहीं है।

👉 गांवों में फैलता जहर,
महुआ शराब के अवैध उत्पादन से न केवल कानून व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि ग्रामीण समाज में नशे की लत तेजी से बढ़ रही है। इससे परिवार टूट रहे हैं, आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है और अपराध भी बढ़ रहे हैं। बावजूद इसके, जिम्मेदार अधिकारियों की सुस्ती और लापरवाही इस समस्या को और गंभीर बना रही है।

👉 जवाबदेही तय होना जरूरी,
अब जरूरत इस बात की है कि सिर्फ छोटे आरोपियों पर कार्रवाई कर खानापूर्ति करने के बजाय इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जाए। साथ ही यह भी तय किया जाए कि इतने लंबे समय से चल रहे इस अवैध कारोबार के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।
आबकारी विभाग की इस कार्रवाई ने जहां एक ओर अवैध शराब के कारोबार की हकीकत उजागर की है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह जहर आने वाले समय में और भी भयावह रूप ले सकता है।

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