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मेहनत, मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीक से बदली किसान की तकदीर, धान से नहीं मिला जितना फायदा, ग्राफ्टेड बैंगन ने बदल दी आर्थिक तस्वीर

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जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम डोंगरी के किसान ओमप्रकाश कुर्रे ने सहायक संचालक जिला उद्यानिकी रंजना माखीजा के मार्गदर्शन और आधुनिक खेती तकनीकों की मदद से अपनी खेती की तस्वीर बदल दी। 1.50 एकड़ भूमि वाले किसान को धान की खेती से जहां लगभग 40 हजार 700 रुपये का शुद्ध लाभ मिला, वहीं ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से करीब 96 हजार रुपये का मुनाफा हुआ। उद्यानिकी विभाग की तकनीकी सहायता, पौध प्रबंधन और बाजार संबंधी जानकारी ने किसान की आय को दोगुने से अधिक बढ़ा दिया। अब ओमप्रकाश कुर्रे अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

 

जांजगीर-चांपा/डोंगरी। अक्सर कहा जाता है कि खेती अब केवल मेहनत का नहीं, बल्कि सही तकनीक और सही मार्गदर्शन का भी खेल है। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम डोंगरी के किसान ओमप्रकाश कुर्रे ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। सीमित जमीन और पारंपरिक खेती के भरोसे गुजर-बसर करने वाले इस किसान ने आज आधुनिक उद्यानिकी खेती अपनाकर अपनी आमदनी को नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया है।

 

ओमप्रकाश कुर्रे, पिता सुखीराम कुर्रे, के पास करीब 1.50 एकड़ कृषि भूमि है। पहले उनकी खेती का मुख्य आधार धान था। हर साल मेहनत तो खूब होती थी, लेकिन आय उतनी नहीं होती थी कि आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सके। ऐसे समय में उन्होंने जिला उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया और खेती में कुछ नया करने का निर्णय लिया।

 

जब मिला सही मार्गदर्शन, तब बदली तस्वीर

 

किसान की सफलता के पीछे जिला उद्यानिकी विभाग का महत्वपूर्ण योगदान रहा। विशेष रूप से सहायक संचालक जिला उद्यानिकी रंजना माखीजा के कुशल निर्देशन और सतत मार्गदर्शन ने किसान को नई दिशा दी। विभाग द्वारा उन्हें उन्नत खेती तकनीक, पौध प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था और बाजार की जानकारी उपलब्ध कराई गई।

 

इसी मार्गदर्शन के आधार पर किसान ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए ग्राफ्टेड बैंगन की खेती को अपनाया। शुरुआत में उन्होंने विभागीय योजनाओं की जानकारी लेकर उद्यानिकी फसलों की ओर कदम बढ़ाया और आधुनिक खेती के तरीकों को व्यवहार में उतारा।

 

धान की खेती में मेहनत ज्यादा, मुनाफा सीमित

 

ओमप्रकाश कुर्रे बताते हैं कि धान की खेती से उन्हें लगभग 17 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इससे कुल आय करीब 52 हजार 700 रुपये हुई। लेकिन जब खाद, मजदूरी और अन्य खर्चों को घटाया गया तो शुद्ध लाभ लगभग 40 हजार 700 रुपये ही बचा।

 

यानी पूरे सीजन की मेहनत के बाद भी आमदनी इतनी नहीं थी कि परिवार की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सके।

 

ग्राफ्टेड बैंगन ने खोले कमाई के नए रास्ते

 

धान की तुलना में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती ने किसान की आर्थिक तस्वीर बदल दी। आधुनिक तकनीक और विभागीय मार्गदर्शन के साथ की गई इस खेती से किसान को लगभग 1 लाख 84 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई।

 

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि लागत निकालने के बाद किसान को करीब 96 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। यह लाभ धान की खेती से मिलने वाले लाभ से दोगुने से भी अधिक है।

 

अब दूसरे किसानों को भी कर रहे प्रेरित

 

ओमप्रकाश कुर्रे का कहना है कि यदि उन्हें जिला उद्यानिकी विभाग और सहायक संचालक रंजना माखीजा का मार्गदर्शन नहीं मिलता, तो शायद वे आज भी केवल पारंपरिक खेती तक ही सीमित रहते। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

 

यही कारण है कि अब वे अपने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाने और नई तकनीकों का उपयोग करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

 

आत्मनिर्भर किसान बनाने की दिशा में प्रयास

 

जिला उद्यानिकी विभाग लगातार किसानों को आधुनिक खेती, उन्नत तकनीकों और शासन की योजनाओं से जोड़ने का कार्य कर रहा है। विभाग का उद्देश्य किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उन्हें अधिक आय और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है।

 

ग्राम डोंगरी के ओमप्रकाश कुर्रे की सफलता इस बात का प्रमाण है कि जब किसान की मेहनत को सही मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीक का साथ मिल जाता है, तो खेत केवल फसल ही नहीं, बल्कि सफलता की नई कहानियां भी उगाने लगते हैं।

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