सतीश शुक्ला लैलूंगा
लाखों की मशीनें गायब,आरटीआई में अधूरी जानकारी
जिम्मेदारों की चुप्पी ने बढ़ाए गंभीर सवाल
लैलूंगा | ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई रीपा (रूरल इंडस्ट्रियल पार्क) योजना का एक चौंकाने वाला मामला लैलूंगा विकासखंड के उप तहसील मुकडेगा से सामने आया है। वर्ष 2022-23 में करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किया गया रीपा आज बदहाली, अव्यवस्था और सवालों का प्रतीक बनकर रह गया है। जिस परिसर को ग्रामीण उद्योग और रोजगार का केंद्र बनना था, वह आज खंडहर में तब्दील होता दिखाई दे रहा है।
मामले की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि निर्माण कार्यों का भुगतान पूरा होने की जानकारी दस्तावेजों में दर्ज है, मशीनों की स्थापना भी रिकॉर्ड में बताई गई है, लेकिन धरातल पर कई मशीनें गायब हैं और पूरा परिसर वीरान पड़ा हुआ है।
*आरटीआई से खुली परतें, लेकिन कई सवाल अब भी अनुत्तरित*
इस पूरे मामले का खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र ठाकुर द्वारा सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों से हुआ है।आरटीआई में प्राप्त जानकारी के अनुसार मुकडेगा रीपा के निर्माण कार्यों का भुगतान पूर्ण बताया गया है। दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि परिसर में स्थापित की जाने वाली मशीनों का कार्य पूरा हो चुका है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि मशीनों की खरीदी, उनकी कीमत, आपूर्तिकर्ता कंपनी, भुगतान की विस्तृत जानकारी और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। आरटीआई में मशीनों से संबंधित जानकारी का अभाव अब पूरे मामले को संदेह के घेरे में खड़ा कर रहा है।
*एक करोड़ निर्माण में, मशीनों के लिए अलग बजट*
जानकारी के अनुसार मुकडेगा रीपा के निर्माण कार्य के लिए लगभग एक करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। यह राशि केवल भवन निर्माण और आधारभूत संरचनाओं के लिए थी। इसके अतिरिक्त मशीनों और उपकरणों की खरीदी के लिए अलग से राशि आबंटित की गई थी। परिसर में चिल्ड्रन रूम, वर्किंग शेड, मिट्टी के बर्तन निर्माण भवन, परीक्षण भवन, बाथरूम, गार्ड रूम सहित कई भवनों का निर्माण कराया गया था। वहीं रोजगार गतिविधियों के लिए राइस मिल मशीन, तेल मिल मशीन, मशरूम ड्रायर और मिट्टी के बर्तन निर्माण मशीन स्थापित किए जाने की जानकारी दी गई है।
*मशीनों का भुगतान हुआ, लेकिन मशीनें कहां हैं?*
रीपा में गठित ग्राम संगठन के माध्यम से मशीनों के भुगतान की प्रक्रिया पूरी की गई थी। जानकारी के अनुसार लगभग 10 से 12 लाख रुपये का भुगतान चेक के माध्यम से अंबिकापुर की एक कंपनी को किया गया। लेकिन आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन मशीनों के लिए लाखों रुपये का भुगतान किया गया, वे मशीनें आखिर कहां हैं? मौके पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार केवल दो मशीनें गांव के एक सामुदायिक भवन में रखी हुई बताई जा रही हैं। शेष मशीनों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आ रहा है। मशीनों की चोरी होने की भी चर्चा है, लेकिन यदि ऐसा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है।
*बिना हैंडओवर के भुगतान कैसे?*
मामले में एक और गंभीर प्रश्न ग्राम संगठन की भूमिका को लेकर उठ रहा है। जानकारी के अनुसार चार-पांच समूहों को मिलाकर एक ग्राम संगठन बनाया गया था, जिसके माध्यम से मशीनों का भुगतान किया गया। लेकिन संबंधित लोगों का कहना है कि ग्राम संगठन को किसी प्रकार का लिखित हैंडओवर नहीं दिया गया था। यदि वास्तव में हैंडओवर नहीं हुआ था, तो फिर लाखों रुपये का भुगतान ग्राम संगठन के माध्यम से किस आधार पर किया गया? ग्राम संगठन के खाते में राशि किसके निर्देश पर जमा की गई? इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
*तत्कालीन सरपंच पति का बड़ा दावा*
मामले में तत्कालीन सरपंच पति का कहना है कि निर्माण कार्य तो हुआ था, लेकिन निर्माण कार्यों का पूरा भुगतान नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि मशीनें कहां हैं, इसकी जानकारी उनके पास नहीं है। वर्तमान में केवल दो मशीनें सामुदायिक भवन में रखी होने की जानकारी है, जबकि मशीनों की खरीदी किस दर पर हुई और कितनी राशि खर्च हुई, इसकी जानकारी भी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है।
यह बयान मामले को और अधिक उलझा देता है, क्योंकि एक ओर आरटीआई में भुगतान पूर्ण होने की जानकारी सामने आती है, वहीं दूसरी ओर भुगतान पूरा नहीं होने का दावा किया जा रहा है।
*गार्डन और फेंसिंग कागजों में, धरातल पर नदारद?*
रीपा परिसर में गार्डन निर्माण और बाउंड्रीवाल अथवा तार फेंसिंग कार्य होने की जानकारी भी सामने आई है। लेकिन वर्तमान स्थिति में परिसर में ऐसा कोई विकसित गार्डन दिखाई नहीं देता। वहीं फेंसिंग और सुरक्षा व्यवस्था का भी अभाव नजर आता है। यदि इन कार्यों के लिए भुगतान किया गया है तो फिर वास्तविक स्थिति क्या है, यह जांच का विषय बन चुका है।
*भवनों की हालत बदहाल, उखड़ चुके शेड और गायब दरवाजे*
जिस रीपा को ग्रामीण उद्योग का मॉडल बनना था, उसकी स्थिति आज बेहद खराब है। भवनों में लगे शेड उखड़ चुके हैं। कई स्थानों से दरवाजे और अन्य सामग्री गायब बताई जा रही है। रखरखाव के अभाव में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित परिसर धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। बोर मशीन भी गायब होने की चर्चा
सूत्रों के अनुसार परिसर में बोर खनन कराया गया था और उसके लिए मशीन भी स्थापित की गई थी। लेकिन वर्तमान में बोर मशीन भी वहां मौजूद नहीं है। यदि सरकारी संपत्ति गायब हुई है तो इसकी जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
*सीईओ ने कैमरे पर बोलने से किया इनकार*
जब इस पूरे मामले को लेकर वर्तमान जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रीति नायडू से मीडिया द्वारा बाइट लेने और उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तब उन्होंने कैमरे पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।
मशीनों की खरीदी, भुगतान, गायब उपकरणों और आरटीआई में अधूरी जानकारी से जुड़े सवालों पर अधिकारियों की चुप्पी अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
अब उठ रहे ये बड़े सवाल
मशीनों की खरीदी किस कंपनी से की गई?
मशीनों की वास्तविक कीमत क्या थी?
मशीन खरीदी का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?
ग्राम संगठन को लिखित हैंडओवर नहीं मिला तो भुगतान किस आधार पर हुआ?
ग्राम संगठन के खाते में राशि किसने जमा कराई?
लाखों रुपये की मशीनें आखिर कहां गईं?
गार्डन, फेंसिंग और अन्य कार्यों की वास्तविक स्थिति क्या है?
सरकारी संपत्तियों के संरक्षण की जिम्मेदारी किसकी थी?
यदि भुगतान पूरा हुआ तो आज परिसर खंडहर क्यों बन गया?
*जांच से ही सामने आएगी सच्चाई*
मुकडेगा रीपा का मामला अब केवल एक निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन, सरकारी योजनाओं की निगरानी, मशीन खरीदी की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। आरटीआई में सामने आए तथ्यों और वर्तमान हालात को देखते हुए पूरे मामले की तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद रीपा रोजगार का केंद्र बनने के बजाय खंडहर में क्यों तब्दील हो गया और आखिर उन मशीनों का क्या हुआ जिनके लिए अलग से लाखों रुपये खर्च किए गए थे।
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ग्राम संगठन में रईस मिल मशीन तेल मिल मशीन मशरूम ड्राई मशीन मिट्टी बर्तन बनाने का मशीन आया था पैसा ग्राम संगठन के खाते में आया था फिर उसे अंबिकापुर के कंपनी को चेक के माध्यम से भुगतान किया गया है प्रस्ताव बनाया गया था बिल भी है लगभग 10 से 12 लाख भुगतान किया गया है बिल को देखने से पता चलेगा कितना है टोटल हम लोगों लिखित में हैंड ओवर नहीं दिया गया है
अहिल्या सिदार ग्राम संगठन सचिव मुकड़ेगा
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आपके माध्यम जानकारी मिल रहा है घटिया निर्माण हुआ और मशीन गायब है तो इसमें निश्चित रूप में जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर से बात करके इस पूरे मामले का जांच करवाता हूं और मैं खुद वहां जाकर देखूंगा
दीपक सिदार उपाध्यक्ष जिला पंचायत रायगढ़
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मेरे द्वारा आरटीआई सूचना के अधिकार के तहत जनपद से जानकारी मांगी गई थी रीपा को लेकर जिसमें मुझे निर्माण कार्य संबंधित जानकारी दी गई है जिसमें पूरा कार्य पूर्ण बताया गया है जहां सम्पूर्ण राशि भी आहरण हो चुका है लेकिन रीपा कैम्पस में सौंदर्यकरण और तार फेंसिंग से बाउंड्री वॉल कार्य,गांधी प्रतिमा भी बताया जा रहा है जिसका संपूर्ण राशि आहरित हो चुका है और यहां बोर खनन भी हुई है लेकिन वर्तमान में दिखाई नहीं दे रहा है और स्थिति यहां पूरी तरह जर्जर है जबकि मैंने मशीनों की खरीदी की भी जानकारी मांगी गई थी कितनी मशीन आई है कितनी मशीन लगी थी कौन-कौन सी मशीन लगाई गई थी सभी जानकारी मेरे द्वारा मांगी गई थी लेकिन जो जन सूचना अधिकारी है जनपद के उनके द्वारा मुझे केवल निर्माण कार्य संबंधित जानकारी ही दिया गया है और मशीनों से संबंधित जानकारी नहीं दी गई है जबकि मशीन यहां आई और लगी फिर कुछ दिन बाद वह गायब हो गई यह पूरा मामला जांच का विषय है।
जितेंद्र कुमार ठाकुर
आरटीआई कार्यकर्ता लैलूंगा
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देख रेख क्या आभाव में खंडहर हो गया है हवा पानी बारिश के समय में आंधी तूफान के कारण यह सब हुआ है और शेड वगैरह उड़ गया है चोरी भी हुआ है और नहीं भी हुआ है और जो इसका पैसा भी पूरा आहरण नहीं हो पाया है।
पूर्व सरपंच प्रतिनिधि हृदयराम दाऊ



