जिम्मेदार नहीं ले रहे सुध, सोनोग्राफी मशीन की सुविधा दिलाने नेताओं ने बहुत सेंकी रोटी लेकिन अब डॉक्टर की कमी पर चुप्पी साधे हुए हैं

लैलूंगा। विकासखंड मुख्यालय लैलूंगा का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वर्षों से स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का दंश झेल रहा है। अस्पताल में लाखों रुपये की लागत से स्थापित सोनोग्राफी मशीन डॉक्टर के अभाव में वर्षों से निष्प्रयोज्य पड़ी हुई है। हालत यह है कि मरीजों की सुविधा के लिए लगाई गई मशीन अब केवल एक कमरे की शोभा बनकर रह गई है और धीरे-धीरे जंग खाने को मजबूर है।

क्षेत्रवासियों, जनप्रतिनिधियों तथा सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। कुछ समय पूर्व सप्ताह में एक-दो दिन के लिए सोनोग्राफी विशेषज्ञ की व्यवस्था की गई थी, जिससे मरीजों को थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन वह व्यवस्था भी अधिक समय तक नहीं चल सकी। वर्तमान में अस्पताल में सोनोग्राफी जांच की सुविधा पूरी तरह ठप है।
90 से 150 किलोमीटर का सफर तय करने को मजबूर मरीज
लैलूंगा अस्पताल में सोनोग्राफी सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को जांच के लिए रायगढ़ जाना पड़ता है। लैलूंगा मुख्यालय से रायगढ़ की दूरी लगभग 90 से 95 किलोमीटर है। वहीं विकासखंड के दूरस्थ गांवों से आने वाले मरीजों को पहले लैलूंगा और फिर रायगढ़ तक का सफर तय करना पड़ता है, जिससे कई बार दूरी 150 किलोमीटर से भी अधिक हो जाती है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च और परेशानी किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। कई मरीज जांच नहीं करा पाते, जिससे उनकी बीमारी की सही पहचान और समय पर उपचार प्रभावित होता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे बड़ी परेशानी
सोनोग्राफी सुविधा बंद होने का सबसे अधिक असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर सोनोग्राफी जांच आवश्यक होती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण महिलाओं को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। कई बार परिवहन और आर्थिक समस्याओं के कारण जांच में देरी हो जाती है, जिससे मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा सकता है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी भारी कमी
लैलूंगा अस्पताल में केवल सोनोग्राफी विशेषज्ञ का ही अभाव नहीं है, बल्कि स्त्री रोग विशेषज्ञ और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी भी लंबे समय से बनी हुई है। क्षेत्र की बड़ी आबादी इस अस्पताल पर निर्भर है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में मरीजों को मजबूरन रायगढ़, अंबिकापुर या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था
एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर लैलूंगा जैसे महत्वपूर्ण विकासखंड मुख्यालय में करोड़ों रुपये की स्वास्थ्य अधोसंरचना डॉक्टरों के अभाव में बेकार पड़ी है। लाखों रुपये की सोनोग्राफी मशीन वर्षों से उपयोग के इंतजार में खड़ी है, लेकिन उसे संचालित करने के लिए स्थायी डॉक्टर की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
क्षेत्रवासियों की मांग
क्षेत्र के नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने स्वास्थ्य विभाग तथा जिला प्रशासन से मांग की है कि लैलूंगा अस्पताल में तत्काल सोनोग्राफी विशेषज्ञ की नियुक्ति की जाए। साथ ही स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी पदस्थापना सुनिश्चित की जाए, ताकि क्षेत्र की जनता को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लंबी दूरी तय करने की मजबूरी से राहत मिल सके।
अब देखना यह होगा कि वर्षों से चली आ रही इस गंभीर समस्या पर प्रशासन कब तक संज्ञान लेता है और लैलूंगा की जनता को कब तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो पाती हैं।



