मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट
एक मांग एक मंच अभियान’ के तहत जुटेंगे नियमित, अनियमित एवं सेवानिवृत्त कर्मचारी-अधिकारी, मुख्य सचिव के नाम सौंपेंगे ज्ञापन
मुंगेली। कर्मचारियों एवं अधिकारियों की लंबे समय से लंबित विभिन्न मांगों को लेकर अब कर्मचारी संगठन एकजुट होकर आंदोलन की राह पर हैं। कर्मचारियों की समस्याओं और लंबित मांगों के निराकरण को लेकर ‘एक मांग एक मंच अभियान’ के बैनर तले नियमित, अनियमित एवं सेवानिवृत्त कर्मचारी-अधिकारी आगामी 11 सितंबर 2026 को भोजनावकाश के दौरान इंद्रावती भवन, नवा रायपुर के सामने सांकेतिक प्रदर्शन करेंगे।
प्रदर्शन के पश्चात कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन के नाम ज्ञापन नोडल अधिकारी को सौंपा जाएगा। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से मांगों को शासन के समक्ष रखा जा रहा है, लेकिन कई महत्वपूर्ण मांगों का अब तक अपेक्षित समाधान नहीं हो पाया है। इसी के चलते विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने एक मंच पर आकर अपनी आवाज बुलंद करने का निर्णय लिया है।
50 से अधिक कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि होंगे शामिल
छत्तीसगढ़ शासकीय लघु वेतन कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष पी. आर. साहू ने बताया कि इस सांकेतिक प्रदर्शन में इंद्रावती भवन में कार्यरत कर्मचारियों के साथ-साथ प्रदेश के 50 से अधिक कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की विभिन्न मांगें लंबे समय से लंबित हैं और इन मांगों का निराकरण कर्मचारियों के हित में आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि कर्मचारी संगठनों द्वारा शासन का ध्यान कर्मचारियों की आर्थिक एवं सेवा संबंधी समस्याओं की ओर आकर्षित करने के लिए यह सांकेतिक प्रदर्शन किया जा रहा है। संगठन का उद्देश्य शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को शासन तक पहुंचाना है।
केंद्र के समान महंगाई भत्ता देने की मांग
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के समान जनवरी 2026 से महंगाई भत्ता (डीए) प्रदान करना शामिल है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है और कर्मचारियों के दैनिक खर्चों में वृद्धि हुई है। ऐसे में महंगाई भत्ते में समय पर वृद्धि नहीं होने से कर्मचारियों पर आर्थिक भार बढ़ रहा है।
इसके साथ ही कर्मचारियों द्वारा 86 माह के एरियर्स का भुगतान करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से लंबित एरियर्स का भुगतान कर्मचारियों के हित में शीघ्र किया जाना चाहिए।
अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग
प्रदर्शन में अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे अनियमित एवं संविदा कर्मचारी स्थायी सेवा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
संगठनों ने अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण, सेवा से निकाले गए कर्मचारियों की बहाली तथा कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में ठोस निर्णय लेने की मांग की है।
आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा बंद करने की मांग
कर्मचारी संगठनों द्वारा सरकारी विभागों में बढ़ती आउटसोर्सिंग एवं ठेका प्रथा को बंद करने की मांग भी की जा रही है। संगठनों का कहना है कि विभागों में नियमित एवं स्थायी प्रकृति के कार्यों के लिए आउटसोर्सिंग तथा ठेका व्यवस्था के स्थान पर नियमित नियुक्ति एवं स्थायी सेवा व्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कर्मचारी नेताओं के अनुसार ठेका एवं आउटसोर्सिंग व्यवस्था से कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, वेतन एवं अन्य सुविधाओं को लेकर कई तरह की समस्याएं सामने आती हैं। इसलिए इस व्यवस्था की समीक्षा कर उचित निर्णय लिया जाना आवश्यक है।
न्यूनतम वेतन एवं संविदा वेतन में वृद्धि की मांग
कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम वेतन एवं संविदा वेतन में अपेक्षित वृद्धि की मांग भी उठाई है। संगठनों का कहना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में सीमित वेतन में परिवार का भरण-पोषण करना कठिन होता जा रहा है। महंगाई के अनुपात में वेतन एवं पारिश्रमिक में वृद्धि नहीं होने से कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग
कर्मचारियों की मांगों में नगरीय निकायों में पुरानी पेंशन योजना लागू करना भी शामिल है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों के आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रभावी पेंशन व्यवस्था आवश्यक है।
इसके अलावा कर्मचारियों एवं पेंशनरों के लिए कैशलेस उपचार सुविधा लागू करने की मांग भी की जा रही है। संगठनों का कहना है कि कर्मचारियों और पेंशनरों को उपचार के दौरान आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े, इसके लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना कर्मचारी हित में महत्वपूर्ण कदम होगा।
लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान की उम्मीद
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि विभिन्न मांगों को लेकर शासन स्तर पर समय-समय पर ध्यान आकर्षित कराया जाता रहा है। इसके बावजूद कई मांगों पर अब तक ठोस निर्णय नहीं होने के कारण कर्मचारियों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
इसी क्रम में 11 सितंबर को इंद्रावती भवन के सामने आयोजित सांकेतिक प्रदर्शन को कर्मचारियों की एकजुटता प्रदर्शित करने के रूप में देखा जा रहा है। प्रदर्शन में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होकर शासन का ध्यान अपनी लंबित मांगों की ओर आकर्षित करेंगे।
कर्मचारी नेताओं ने प्रदेशभर के संबंधित कर्मचारी संगठनों एवं प्रतिनिधियों से इस अभियान में सहभागिता करने की अपील की है। उनका कहना है कि ‘एक मांग एक मंच अभियान’ के माध्यम से अलग-अलग संगठनों की मांगों को एक मंच पर लाकर शासन के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा जाएगा।
प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों की मांगों से संबंधित ज्ञापन मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन के नाम नोडल अधिकारी को सौंपा जाएगा। कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि शासन उनकी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगा।
प्रमुख मांगें एक नजर में
– केंद्र के समान जनवरी 2026 से महंगाई भत्ता प्रदान किया जाए।
– 86 माह के एरियर्स का भुगतान किया जाए।
– अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए।
– सेवा से निकाले गए कर्मचारियों की बहाली की जाए।
– आउटसोर्सिंग एवं ठेका प्रथा बंद की जाए।
– न्यूनतम वेतन एवं संविदा वेतन में उचित वृद्धि की जाए।
– नगरीय निकायों में पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए।
– कर्मचारियों एवं पेंशनरों के लिए कैशलेस उपचार सुविधा लागू की जाए।
– कर्मचारियों की अन्य लंबित सेवा संबंधी मांगों का शीघ्र निराकरण किया जाए।
11 सितंबर का यह सांकेतिक प्रदर्शन कर्मचारियों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर शासन के समक्ष एकजुटता और अपनी मांगों की गंभीरता दर्ज कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



