कौशल्या देवी साय ने कहा- स्वसहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं योजनाओं का लाभ उठाएं और आर्थिक रूप से मजबूत बनें
उत्तर बस्तर कांकेर, भारतीय आदिम जाति सेवक संघ (स्टेट बोर्ड छत्तीसगढ़) द्वारा बस्तर क्षेत्र की महिलाओं के उत्थान, सम्मान, स्वावलंबन एवं उज्ज्वल भविष्य की दिशा में ‘उम्मीद की उड़ान’ कार्यक्रम का आयोजन कांकेर में किया गया।
कार्यक्रम में कांकेर, सुकमा, बस्तर एवं नारायणपुर जिले से स्व-सहायता समूहों की महिलाएं शामिल हुईं। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को आजीविका के अवसरों, स्वरोजगार और शासन की योजनाओं से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भारतीय आदिम जाति सेवक संघ की प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती कौशल्या देवी साय थीं। उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाएं अधिक से अधिक संख्या में स्व-सहायता समूहों से जुड़ें और लखपति दीदी योजना सहित शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर स्वयं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएं।
उन्होंने कहा कि बस्तर में परिस्थितियों में बदलाव के साथ महिलाओं के सामने आगे बढ़ने के नए अवसर उपलब्ध हैं। समय कम है और काम अधिक है, इसलिए महिलाएं एकजुट होकर इन अवसरों का लाभ उठाएं। श्रीमती कौशल्या देवी साय ने स्थानीय संसाधनों को आजीविका से जोड़ने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिमी कंद को पकाकर, सुखाने के बाद उसकी पैकिंग कर बाजार में बिक्री की जा सकती है। जिमी कंद और मुनगा को मध्याह्न भोजन में शामिल करने की दिशा में भी प्रयास किए जा सकते हैं।
इच्छुक महिलाएं कपड़ों एवं फैब्रिक पर डिजाइन तैयार कर अपनी कला को आय का माध्यम बना सकती हैं। उन्होंने महिलाओं को गेंदा फूल की खेती करने तथा एक-दूसरे से सलाह लेकर अपने अनुभव एवं ज्ञान को साझा करने के लिए भी प्रेरित किया। चरोटा भाजी जैसे स्थानीय खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने की बात कही तथा बच्चों और बड़ों के लिए पौष्टिक स्थानीय खाद्य पदार्थों के उपयोग को प्रोत्साहित किया।
उन्होंने दोना-पत्तल के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सामाजिक एवं पारिवारिक कार्यक्रमों में भी दोना-पत्तल का उपयोग किया जाए, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सके।
महिलाओं की आर्थिक उन्नति से परिवार में आएगी खुशहाली – श्री आशाराम नेताम
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कांकेर विधायक श्री आशाराम नेताम ने कहा कि सरकार की सोच है कि अधिक से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनें और आर्थिक रूप से आगे बढ़ें। महिलाओं की आर्थिक उन्नति से परिवार में खुशहाली आएगी। उन्होंने महिलाओं से केन्द्र सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के साथ ही मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित योजनाओं का भी लाभ उठाने का आह्वान किया।
बस्तर में विकास को मिलेगी नई गति – डॉ. ममता साहू
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने कहा कि बस्तर में नक्सल समस्या के प्रभाव से बाहर निकलने के बाद विकास को गति देने के नए अवसर सामने आए हैं। उन्होंने महिलाओं से आगे बढ़कर अपने अधिकारों और उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को किसी प्रकार की समस्या हो तो वे अपनी बात महिला आयोग के समक्ष रख सकती हैं।
महिलाओं से सीधा संवाद स्थापित करने बनाया जाएगा व्हाट्स ऐप समूह- प्रकाश कुमार उईके
भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री प्रकाश कुमार उईके ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में शामिल स्व-सहायता समूहों की महिलाओं का व्हाट्स ऐप समूह बनाया जाएगा, जिसके माध्यम से महिलाएं अपनी समस्याएं एवं सुझाव सीधे संगठन तक पहुंचा सकेंगी। भारतीय आदिम जाति सेवक संघ (स्टेट बोर्ड छत्तीसगढ़) के प्रदेश अध्यक्ष श्री कुंवर जितेन्द्र नरसिंह राणा तथा संगठन के राष्ट्रीय प्रशासनिक अधिकारी श्री जी.आर. चुरेन्द्र ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वावलंबन की दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में कांकेर, सुकमा, बस्तर एवं नारायणपुर जिले से पहुंचीं स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने अपने-अपने समूहों द्वारा संचालित गतिविधियों, आजीविका कार्यों और उपलब्धियों की जानकारी साझा की। महिलाओं ने समूह के माध्यम से किए जा रहे कार्यों तथा भविष्य की संभावनाओं पर भी अपने अनुभव साझा किए।
इस अवसर पर पद्मश्री श्री अजय मंडावी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण नेरेटी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती तारा ठाकुर, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पूर्णिमा कावड़े, नगर पालिका परिषद कांकेर अध्यक्ष श्री अरुण कौशिक, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी, श्रीमती अर्चना गोस्वामी सहित जनप्रतिनिधि, संगठन के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं उपस्थित रहीं।



