मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट
नियमितीकरण, राजस्व विभाग में संविलियन और 15 हजार रुपये मासिक मानदेय की मांग; नियुक्ति में कोटवार परिवारों को प्राथमिकता देने तथा नगरीय निकायों में नियुक्ति पर प्रतिबंध हटाने की उठाई आवाज
नायब तहसीलदार चंदन दुबे ने कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में लिया ज्ञापन; प्रांतीय महामंत्री प्रेमदास मानिकपुरी, जिला अध्यक्ष संतोष कुमार मानिकपुरी सहित पदाधिकारी एवं सदस्य रहे उपस्थित
मुंगेली/लोरमी। छत्तीसगढ़ में कोटवारों की लंबित मांगों को लेकर आवाज बुलंद करने के उद्देश्य से शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को मुंगेली जिला मुख्यालय स्थित अगर क्लब में कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ के आह्वान पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस दौरान मुंगेली जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लगभग 200 कोटवारों ने एकजुट होकर अपनी चार सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से उठाया और शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शन के बाद कोटवारों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
धरना-प्रदर्शन में कोटवारों ने नियमितीकरण, राजस्व विभाग में संविलियन, महंगाई के अनुपात में मासिक मानदेय बढ़ाकर 15 हजार रुपये करने, नियुक्ति में कोटवार परिवारों के सदस्यों को प्राथमिकता देने तथा नगर पालिका एवं नगर निगम क्षेत्रों में कोटवार नियुक्ति पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग उठाई।
कोटवारों का कहना है कि वे ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और लंबे समय से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी सेवा शर्तों, आर्थिक स्थिति और भविष्य की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर ठोस निर्णय की आवश्यकता बनी हुई है। इसी को लेकर संगठन ने जिला मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगों को सामूहिक रूप से शासन तक पहुंचाने का प्रयास किया।
कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में नायब तहसीलदार चंदन दुबे उपस्थित रहे। उन्होंने कोटवारों से ज्ञापन प्राप्त किया और उसे उच्च स्तर पर प्रेषित करने की बात कही। अब कोटवारों की निगाहें राज्य सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। हालांकि, मांगों की स्वीकृति या उनके निराकरण के लिए कोई निश्चित समय-सीमा घोषित होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
अगर क्लब में जुटे जिलेभर के कोटवार, एकजुट होकर उठाई आवाज
मुंगेली जिला मुख्यालय स्थित अगर क्लब में आयोजित धरना-प्रदर्शन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 200 कोटवार शामिल हुए। सभी ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर संगठन की एकजुटता प्रदर्शित की और सरकार से समस्याओं के समाधान की मांग की।
कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य कोटवारों की समस्याओं को संगठित तरीके से शासन-प्रशासन तक पहुंचाना था। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार को उनकी सेवा व्यवस्था और पारिश्रमिक से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान हो सके।
कोटवारों के अनुसार, वे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और आम नागरिकों के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी सेवा शर्तों, आर्थिक सुरक्षा और नियुक्ति संबंधी विषयों पर स्पष्ट नीति बनाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से जिला मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन आयोजित कर अपनी मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा गया।
मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन, नायब तहसीलदार चंदन दुबे ने लिया आवेदन
धरना-प्रदर्शन के दौरान कोटवार एसोसिएशन की ओर से मुख्यमंत्री के नाम चार सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित नायब तहसीलदार चंदन दुबे ने आवेदन प्राप्त किया और उसे उच्च स्तर पर प्रेषित करने की बात कही।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने शासन से मांग की कि कोटवारों की समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। संगठन का मानना है कि नियमितीकरण, मानदेय वृद्धि और नियुक्ति संबंधी मांगों पर निर्णय होने से कोटवारों तथा उनके परिवारों को राहत मिल सकती है।
हालांकि, ज्ञापन प्राप्त करना मांगों की स्वीकृति के समान नहीं है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इन मांगों पर क्या निर्णय लेती है और उनके निराकरण के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
पहली मांग: कोटवारों को नियमित कर राजस्व विभाग में किया जाए संविलियन
कोटवार एसोसिएशन की पहली प्रमुख मांग कोटवारों के नियमितीकरण और राजस्व विभाग में संविलियन से संबंधित है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे कोटवारों की सेवा व्यवस्था को स्पष्ट और सुरक्षित बनाया जाना चाहिए, ताकि उन्हें अपने रोजगार और भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।
कोटवार ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में संगठन चाहता है कि उनकी सेवाओं की प्रकृति और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए नियमितीकरण तथा राजस्व विभाग में संविलियन की मांग पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
एसोसिएशन का मानना है कि नियमितीकरण से सेवा संबंधी व्यवस्थाओं में स्पष्टता आ सकती है और कोटवारों को अपने भविष्य के प्रति अधिक सुरक्षा मिल सकती है। संगठन ने सरकार से आग्रह किया है कि इस मांग पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कदम उठाए जाएं।
दूसरी मांग: महंगाई के दौर में 15 हजार रुपये मासिक मानदेय
कोटवारों की दूसरी प्रमुख मांग मासिक मानदेय में वृद्धि की है। संगठन ने महंगाई को ध्यान में रखते हुए पारिश्रमिक बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग रखी है।
आज के समय में घरेलू जरूरतों, खाद्य सामग्री, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आवागमन पर होने वाले खर्च का असर आम परिवारों पर पड़ रहा है। ऐसे में कोटवारों का कहना है कि उनके पारिश्रमिक की समीक्षा कर सम्मानजनक मासिक मानदेय निर्धारित किया जाना चाहिए।
संगठन के अनुसार, मानदेय में वृद्धि से कोटवार परिवारों को आर्थिक राहत मिल सकती है। इसी उद्देश्य से ज्ञापन में 15 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय की मांग को प्रमुखता से शामिल किया गया है।
अब सवाल यह है कि राज्य सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और क्या कोटवारों के पारिश्रमिक में वृद्धि के संबंध में कोई ठोस प्रस्ताव सामने आता है।
तीसरी मांग: नियुक्ति में कोटवार परिवारों के सदस्यों को मिले प्राथमिकता
कोटवार एसोसिएशन की तीसरी मांग नियुक्ति प्रक्रिया में कोटवार परिवारों के सदस्यों को प्राथमिकता देने से संबंधित है। संगठन ने गैर-वंशज सदस्यों की नियुक्ति पर रोक लगाने तथा पूर्व की व्यवस्था के अनुरूप कोटवारों के परिवार के पात्र सदस्यों को प्राथमिकता देने की मांग की है।
संगठन का कहना है कि कई परिवार लंबे समय से कोटवारी कार्य से जुड़े हुए हैं। ऐसे में नियुक्ति संबंधी निर्णय लेते समय उनके परिवारों की परिस्थितियों और हितों पर भी विचार किया जाना चाहिए।
एसोसिएशन चाहता है कि इस विषय पर शासन स्पष्ट नीति बनाए, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर असमंजस की स्थिति दूर हो सके। संगठन ने सरकार से आग्रह किया है कि संबंधित नियमों और प्रावधानों के अनुरूप कोटवार परिवारों के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाए।
चौथी मांग: नगर पालिका और नगर निगम क्षेत्रों में नियुक्ति पर प्रतिबंध हटे
कोटवारों की चौथी प्रमुख मांग नगरीय निकाय क्षेत्रों में नियुक्ति पर लगे प्रतिबंध को हटाने की है। संगठन ने नगर पालिका और नगर निगम क्षेत्रों में कोटवार नियुक्ति पर लगाए गए प्रतिबंध को समाप्त करने की मांग की है।
एसोसिएशन का कहना है कि नियुक्ति संबंधी व्यवस्था की समीक्षा कर कोटवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट निर्णय लिया जाना चाहिए। संगठन चाहता है कि इस विषय पर शासन आवश्यक कदम उठाए और पात्र व्यक्तियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित नीति बनाए।
यह मांग भी मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में शामिल की गई है। अब इस विषय पर शासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
चार सूत्रीय मांगों पर सरकार से ठोस निर्णय की अपेक्षा
मुंगेली जिला मुख्यालय में आयोजित धरना-प्रदर्शन के माध्यम से कोटवारों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि उनकी मांगें केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं हैं। नियमितीकरण और संविलियन का मुद्दा उनकी सेवा व्यवस्था से जुड़ा है, जबकि मानदेय वृद्धि उनकी आर्थिक जरूरतों से संबंधित है।
इसी प्रकार नियुक्ति प्रक्रिया में परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता देने और नगरीय निकाय क्षेत्रों में नियुक्ति पर प्रतिबंध हटाने की मांग उनके भविष्य से जुड़ी हुई है।
संगठन का कहना है कि इन विषयों पर स्पष्ट नीति बनने से कोटवारों को अपनी सेवा और भविष्य के संबंध में स्थिति समझने में मदद मिलेगी। अब शासन के सामने इन मांगों पर विचार कर लागू नियमों, प्रशासनिक आवश्यकताओं और वित्तीय पहलुओं के अनुरूप निर्णय लेने की चुनौती है।
प्रेमदास मानिकपुरी, संतोष कुमार मानिकपुरी सहित पदाधिकारी रहे उपस्थित
अगर क्लब में आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ के प्रांतीय महामंत्री प्रेमदास मानिकपुरी, करनराम गंधर्व तथा जिला अध्यक्ष संतोष कुमार मानिकपुरी उपस्थित रहे। इनके साथ कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़, जिला मुंगेली के समस्त सदस्य एवं पदाधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
पदाधिकारियों और सदस्यों ने कोटवारों की चार सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से उठाया तथा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
कार्यक्रम में उपस्थित कोटवारों ने अपनी समस्याओं को संगठित रूप से शासन-प्रशासन के सामने रखने पर जोर दिया। संगठन की उम्मीद है कि ज्ञापन के माध्यम से उठाए गए मुद्दों पर संबंधित विभाग गंभीरता से विचार करेंगे और समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल की जाएगी।
अब शासन के निर्णय पर टिकी कोटवारों की निगाहें
मुंगेली जिला मुख्यालय में लगभग 200 कोटवारों की भागीदारी के साथ आयोजित धरना-प्रदर्शन के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राज्य सरकार इन मांगों पर कब तक विचार करेगी।
क्या कोटवारों के नियमितीकरण और राजस्व विभाग में संविलियन की दिशा में पहल होगी? क्या 15 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय की मांग पर कोई निर्णय लिया जाएगा? क्या नियुक्ति प्रक्रिया में कोटवार परिवारों को प्राथमिकता देने के संबंध में स्पष्ट व्यवस्था बनेगी? और क्या नगरीय निकाय क्षेत्रों में नियुक्ति पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग पर सरकार कोई कदम उठाएगी?
इन सवालों का जवाब राज्य सरकार की आगामी कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा। फिलहाल कलेक्टर के प्रतिनिधि नायब तहसीलदार चंदन दुबे द्वारा आवेदन को उच्च स्तर पर प्रेषित करने की बात कही गई है। कोटवारों को उम्मीद है कि उनकी मांगें शासन तक पहुंचेंगी और उन पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
निष्कर्ष: ज्ञापन शासन तक पहुंचाने की पहल, अब फैसले का इंतजार
मुंगेली जिला मुख्यालय के अगर क्लब में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को आयोजित एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन के माध्यम से कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को प्रशासन के सामने रखा। इस कार्यक्रम में जिले के लगभग 200 कोटवार शामिल हुए।
नियमितीकरण एवं राजस्व विभाग में संविलियन, 15 हजार रुपये मासिक मानदेय, नियुक्ति में कोटवार परिवारों के सदस्यों को प्राथमिकता तथा नगर पालिका और नगर निगम क्षेत्रों में नियुक्ति पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
कलेक्टर के प्रतिनिधि नायब तहसीलदार चंदन दुबे ने ज्ञापन प्राप्त करते हुए आवेदन को उच्च स्तर पर प्रेषित करने की बात कही। कार्यक्रम में प्रांतीय महामंत्री प्रेमदास मानिकपुरी, करनराम गंधर्व, जिला अध्यक्ष संतोष कुमार मानिकपुरी सहित जिले के सदस्य एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
अब कोटवारों की निगाहें राज्य सरकार के निर्णय पर टिकी हैं। संगठन की मांग है कि उनकी समस्याओं का समाधान केवल आश्वासन तक सीमित न रहे, बल्कि नियमितीकरण, मानदेय वृद्धि और नियुक्ति संबंधी विषयों पर ठोस कार्रवाई की जाए। आने वाले समय में शासन की प्रतिक्रिया ही तय करेगी कि कोटवारों की चार सूत्रीय मांगों पर किस दिशा में प्रगति होती है।



