
प्रमोद अवस्थी मस्तूरी
मस्तूरी। एनटीपीसी सीपत में 07 नवंबर 2026 को देश की सबसे बड़ी विद्युत उत्पादक कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड का स्थापना दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में परियोजना प्रमुख विजय शंकर दुबे को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। तत्पश्चात् उन्होंने एनटीपीसी ध्वज फहराकर समारोह का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए परियोजना प्रमुख ने एनटीपीसी की 51 वर्षों की गौरवशाली यात्रा और उपलब्धियों को स्मरण किया तथा सभी को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बताया कि देशभर में लगभग 119 एनटीपीसी स्टेशनों के माध्यम से कंपनी की कुल स्थापित क्षमता लगभग 91,668 मेगावाट तक पहुंच गई है। आज एनटीपीसी देश की कुल बिजली आवश्यकताओं का लगभग 25 प्रतिशत पूरा कर रही है और देश के हर चौथे बल्ब को रोशन कर रही है।
परियोजना प्रमुख ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी 2,980 मेगावाट क्षमता वाली सीपत सुपर थर्मल पावर स्टेशन की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि निर्माणाधीन 800 मेगावाट की स्टेज-III परियोजना का कार्य तेजी से प्रगति कर रहा है। इसके साथ ही, एनटीपीसी सीपत विद्युत उत्पादन के साथ-साथ नैगम सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर), पर्यावरण संरक्षण और नवाचार के क्षेत्रों में भी सराहनीय कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम के दौरान परियोजना प्रमुख, महाप्रबंधकगण, विभागाध्यक्षगण, वरिष्ठ अधिकारी तथा यूनियन एवं एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से केक काटकर स्थापना दिवस की खुशियां मनाईं। इसके पश्चात् एनटीपीसी के रंगों से सजे गुब्बारे आसमान में छोड़े गए। इस अवसर पर परियोजना प्रमुख ने संयंत्र एवं नगर परिसर की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, संगवारी महिला समिति, यूनियन एवं एसोसिएशन, बाल भारती पब्लिक स्कूल, संस्कृति क्लब, वैशाली क्लब, स्टेट बैंक, पोस्ट ऑफिस, इंडियन कॉफी हाउस तथा सभी सहयोगी एजेंसियों के योगदान की सराहना की और सभी को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं।
तत्पश्चात् एनटीपीसी के इंजीनियरिंग ऑफिस कॉम्प्लेक्स, नोएडा में आयोजित मुख्य स्थापना दिवस समारोह का सीधा प्रसारण देखा गया। इस अवसर पर एनटीपीसी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री गुरदीप सिंह ने सभी कर्मचारियों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं तथा कंपनी की उल्लेखनीय उपलब्धियों एवं भावी लक्ष्यों को साझा किया। उन्होंने बताया कि एनटीपीसी वर्ष 2032 तक 149 और 2037 तक 244 गीगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में निरंतर अग्रसर है।
2,300 पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

एनटीपीसी लिमिटेड के स्थापना दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और हरित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में ग्राम गुड़ी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में विशेष पौधारोपण अभियान चलाया गया। इस अभियान के अंतर्गत एक ही दिन में कुल 2,300 पौधे लगाए गए।
इस अवसर पर विजय शंकर दुबे, परियोजना प्रमुख, एनटीपीसी सीपत; सुरोजीत सिन्हा, महाप्रबंधक (O&M); अशोक सरकार, महाप्रबंधक (Operation & FM); लिंगम वेंकट रेड्डी, महाप्रबंधक (Maintenance); भरत गंगवानी, प्राचार्य, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गुड़ी; दुर्गा प्रसाद साहू, सरपंच, ग्राम पंचायत गुड़ी; विद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी, वार्ड सदस्य, स्थानीय ग्रामीण तथा छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड के अधिकारी उपस्थित रहे।
बालिका सशक्तिकरण अभियान के अंतर्गत 10 बालिकाओं को साइकिल और 4 दिव्यांगजनों को बैटरी चलित रिक्शा भेंट

स्थापना दिवस के अवसर पर एनटीपीसी सीपत द्वारा नैगम सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के अंतर्गत 10 बालिकाओं को साइकिल तथा चार दिव्यांगजनों को बैटरी चलित रिक्शा प्रदान किए गए। ये 10 बालिकाएं हाल ही में संपन्न बालिका सशक्तिकरण अभियान के अंतर्गत चयनित की गई हैं। एनटीपीसी ने इन बालिकाओं की कक्षा 6 से कक्षा 12 तक की शिक्षा बाल भारती पब्लिक स्कूल, एनटीपीसी सीपत में पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ली है।
उल्लेखनीय है कि एनटीपीसी सीपत प्रतिवर्ष लगभग 130 बालिकाओं को एक माह का पूर्ण आवासीय प्रशिक्षण प्रदान करता है। इसके पश्चात् 10 मेधावी बालिकाओं का चयन कर उन्हें कक्षा 12 तक बाल भारती पब्लिक स्कूल में निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। उनकी शिक्षा संबंधी सुविधाओं का पूरा खर्च एनटीपीसी वहन करता है। इस अभियान के अंतर्गत अब तक कुल 641 बालिकाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इनमें से 53 मेधावी बालिकाओं की बाल भारती पब्लिक स्कूल में निःशुल्क शिक्षा एवं अन्य सुविधाओं की जिम्मेदारी एनटीपीसी सीपत ने ली है।
इसी क्रम में एनटीपीसी के प्रभावित ग्रामों के चार दिव्यांगजनों को बैटरी चलित रिक्शा प्रदान किए गए, ताकि उनके दैनिक जीवन को सुगम बनाया जा सके और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिले।



