बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – कृषि विज्ञान केंद्र, बीजापुर में मशरूम उत्पादन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह-आदान वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के वैज्ञानिक डॉ. हरविंदर कुमार सिंह उपस्थित रहे। प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. शमशेर आलम ने किसानों को क्षेत्र में उगाई जाने वाली मशरूम प्रजातियों और इसकी लागत संबंधी जानकारी दी। मुख्य अतिथि डॉ. एच. के. सिंह ने बताया कि धान के पुआल और गेहूं के भूसे जैसे कृषि अवशेषों से मशरूम उत्पादन कर उच्च प्रोटीन युक्त आहार प्राप्त किया जा सकता है, जो कुपोषण दूर करने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है। उन्होंने यह भी बताया कि उत्पादन के बाद बचे अवशेषों से केंचुआ खाद तैयार कर जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है। डॉ. राजकमल पटेल ने मशरूम से प्राप्त खाद के प्राकृतिक खेती में महत्व को बताया। प्रशिक्षण में 50 से अधिक किसानों और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया तथा अंत में मशरूम स्पॉन व प्रमाणपत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर डॉ. मिथिलेश कुमार, डॉ. भूपेंद्र, डॉ. सुनीता पटेल, डॉ. दिनेश कुमार मारापी सहित अन्य उपस्थित रहे।



