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मिट्टी की दशा में सुधार और उत्पादन क्षमता में वृद्धि करती है हरी खाद

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उत्तर बस्तर कांकेर 23 अप्रैल 2026/ मृदा (मिट्टी) के लगातार दोहन से उसमें उपस्थित पौधे की बढ़वार के लिए आवश्यक तत्व नष्ट होते जा रहे हैं। इनकी क्षतिपूर्ति के लिए व मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बनाये रखने के लिए हरी खाद एक उत्तम विकल्प है। कृषि विभाग ने जिले के किसानों के लिए हरी खाद को बेहतर विकल्प के तौर पर उपयोग करते हेतु समसामयिक सलाह दी है।
इस संबंध में बताया गया कि हरी खाद उस फसल को कहते हैं, जिसकी खेती मुख्यतः भूमि में पोषक तत्वों को बढ़ाने तथा उसमें जैविक पदार्थो की पूर्ति करने के उद्देश्य से की जाती है। हरी खाद वाली फसल के रूप में मुख्यतः ढेंचा, सन, लोबिया, मूंग, उड़द, ग्वार, बरसीम आदि फसलों का उपयोग किया जाता है। इनमें से भी ढेंचा व सन अत्यधिक उपयोग किए जाते हैं। इन हरी खाद वाली फसलों को उगाकर इन्हें खड़ी अवस्था में ही फूल आने से पहले (40-45 दिन बाद) मिट्टी में ट्रैक्टर से हल चलाकर दबा दिया जाता है। इसके बाद ये फसलें सड़कर लगभग 10-15 दिन में खाद बनती है, इसे ही हरी खाद कहा जाता है। इसके बाद खेतों में धान की रोपाई की जाती है। उप संचालक कृषि ने बताया कि जिले को 58.80 कि्ंवटल ढेंचा व 29.40 कि्ंवटल मूंग हरी खाद हेतु लक्ष्य प्राप्त हुआ है। ढेंचा 8 किलोग्राम व मूंग 4 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से 50 प्रतिशत अनुदान पर प्राप्त किया जा सकता है।
हरी खाद के फायदेः-
इसके फायदे के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हरी खाद को मिट्टी में मिलाने से मिट्टी की भौतिक दशा में सुधार होता है व मृदा भुरभुरी, अधिक वायु संचार वाली, जलधारण क्षमता में वृद्धि, अम्लीयता, क्षारीयता में सुधार एवं मृदा क्षरण में भी कमी होती है। मृदा में सूक्ष्मजीवों की संख्या व क्रियाशीलता बढ़ती है। मृदा की उर्वरता शक्ति एवं उत्पादन क्षमता भी बढ़ती है। इसके उपयोग से मृदा जनित रोगां में भी कमी आती है। इसके प्रयोग से रासायनिक उर्वरकों में कमी करके टिकाऊ खेती की जा सकती है। हरी खाद (जैसे ढेंचा, सनई) से प्रति हेक्टेयर लगभग 50 से 175 किलोग्राम नाइट्रोजन मिट्टी को मिलती है। एक हेक्टेयर में लगभग 6-7 टन (60-70 क्विंटल) से लेकर 10 टन तक हरा बायोमास (पत्ते और तना) मिल सकता है, जो सड़ने के बाद जैविक खाद बन जाती है। यह मिट्टी में कार्बनिक कार्बन को बढ़ाती है और मिट्टी की जल धारण क्षमता में सुधार करती है।

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