कांकेर । जिले के दूधवा क्षेत्र अंतर्गत मुसुरपुट्टा ग्राम में कथित रूप से बड़े पैमाने पर गौ तस्करी का मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यहां खुलेआम मवेशियों को इकट्ठा कर उड़ीसा से आए दलालों के हाथों नीलाम किया जा रहा है। इसके बाद इन मवेशियों को उड़ीसा और पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश तक ले जाकर कत्लखानों में भेजे जाने की आशंका जताई जा रही है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस पूरे अवैध कारोबार की जानकारी कथित रूप से स्थानीय पुलिस प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, हिंदू संगठनों, गौ सेवकों और पत्रकारों तक को होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। कुछ स्थानीय पत्रकारों द्वारा इस मुद्दे को लगातार उठाने के बावजूद भी यह काला कारोबार वर्षों से ‘सेटिंग’ के दम पर बेखौफ जारी है।
ग्रामीणों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि यदि आम जनता छोटी-छोटी गलतियों पर कानून के शिकंजे में आ सकती है, तो इतने बड़े स्तर पर हो रहे अवैध व्यापार पर प्रशासन की चुप्पी क्यों?
स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि क्या कानून सिर्फ आम लोगों के लिए ही लागू होता है? क्या जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस गंभीर मुद्दे पर आंखें मूंदे बैठे रहेंगे?
ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द से जल्द इस गौ तस्करी पर रोक लगाकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता खुद सड़कों पर उतरकर जवाब मांगेगी।
यह मामला न सिर्फ अवैध व्यापार का है, बल्कि व्यवस्था और कानून व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान भी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक मौन रहता है और कब ठोस कदम उठाता है।



