Who is Sarabjit Singh? Stayed in Pakistani jail for 22 years, then the prisoners killed him…
चंडीगढ़। पाकिस्तान के बुरे कर्मों का कोई अंत नहीं है। पड़ोसी मुल्क होते हुए भी यह भारत के साथ हमेशा छल ही करता रहा है। आज जब सरबजीत सिंह का हत्यारा अंडरवर्ल्ड डॉन आमिर सरफराज को मारा गया तो पाकिस्तान के पापों की फाइल फिर खुल गई। सरबजीत के हत्यारे को उसके कर्मों की सजा मिली है! जिस हत्यारे को पाकिस्तान ने निर्दोष साबित कर दिया था। नीचें पढ़िए पूरी खबर…
कौन थे सरबजीत सिंह:- सरबजीत सिंह भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे तरनतारन जिले के भिखीविंड गांव के रहने वाले थे। वे किसान थे। उनके परिवार में पत्नी सुखप्रीत कौर के अलावा दो बेटियां स्वप्नदीप और पूनम कौर थीं। सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने 1991 से 2013 में उनकी मृत्यु तक उनकी रिहाई के लिए लगातार पैरवी की थी। 30 अगस्त 1990 को वह अनजाने में पाकिस्तानी सीमा में पहुंच गए थे, जहां से उन्हें पाकिस्तानी सेना ने गिरफ्तार कर लिया था। सरबजीत सिंह को 1990 में पाकिस्तान में कई बम विस्फोटों में कथित तौर पर शामिल होने का दोषी करार दिया गया था। इसके लिए उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, भारत में सरबजीत सिंह के परिवार का कहना है कि वह गलत पहचान का शिकार हुए और अनजाने में सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंच गए थे। साल 1991 में पाकिस्तान की कोर्ट ने सरबजीत सिंह को लाहौर और फैसलाबाद में हुए चार बम धमाकों के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी। इन धमाकों में करीब 10 लोगों की मौत हुई थी। हालांकि, कई बार सरबजीत सिंह की सजा को अस्थायी तौर पर टाला भी गया था। मार्च 2006 में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने सरबजीत की दया याचिका खारिज करते हुए उन्हें सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा था। 26 अप्रैल 2013 को कड़ी सुरक्षा वाली कोट लखपत जेल के अंदर तांबा सहित अन्य कैदियों ने सरबजीत पर बर्बर हमले किए। उन पर ईंट और लोहे की छड़ों से वार किए गए। इसके बाद उन्हें बेहोशी की हालत में अस्पताल ले जाया गया। कुछ दिनों बाद सरबजीत सिंह (49) की दो मई 2013 की सुबह लाहौर के जिन्ना अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई थी। हमले के बाद करीब एक हफ्ते तक वे अचेत रहे थे।
पाकिस्तान की झूठी कहानी:- पाकिस्तान का दिल यहां भी नहीं पसीजा। पाकिस्तान ने बयान जारी कर कहा कि सरबजीत सिंह की दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई। आमिर पर सरबजीत सिंह की हत्या के आरोप तो लगे लेकिन कोर्ट ने उसे बरी कर दिया। सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने पाकिस्तान से उनकी रिहाई के लिए लंबी लड़ाई लड़ी थी लेकिन असफल रहीं।
सरबजीत की बेटी ने क्या कहा:- रिपोर्ट्स के मुताबिक सरबजीत के हत्यारे अमीर सरफराज की हत्या पर सरबजीत की बड़ी बेटी स्वपनदीप कौर ने कहा कि कर्मों का फल यहीं पर मिल जाता है। उसे (अमीर सरफराज) उसके कर्मों की सजा मिली है। पाकिस्तान ने साजिश रचकर मेरे पापा (सरबजीत सिंह) की हत्या करवाई थी.. हो सकता है अब उसी साजिश के तहत अमीर सरफराज की भी हत्या करवाई हो।
कौन थे सरबजीत सिंह?
सरबजीत सिंह अटवाल का जन्म पंजाब के तरनतारन जिले में भारत-पाकिस्तान की सीमा पर भिखीविंड में हुआ था. सरबजीत सिंह और उनकी पत्नी सुखप्रीत कौर की दो बेटियां थीं – स्वप्नदीप और पूनम कौर. बहन दलबीर कौर ने 1991 से 2013 में सरबजीत सिंह की मौत तक उनकी रिहाई के लिए लगातार कोशिश की. 1990 में लाहौर और फैसलाबाद में सिलसिलेवार बम धमाकों के लिए पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उन पर मुकदमा चलाया गया था और दोषी ठहराया गया था, जिसमें 14 लोग मारे गए थे. साथ ही सरबजीत सिंह को आतंकवाद और जासूसी का भी दोषी ठहराया गया. हालांकि भारत का कहना था कि सरबजीत सिंह एक किसान थे, जो इन धमाकों के महीनों बाद भटककर पाकिस्तान चले गए थे. 1991 में कोर्ट ने उन्हें मौत की सजा सुनाई. हालांकि पाकिस्तान ने उनकी सजा को कई बार टाला.
उच्च सुरक्षा वाली जेल में हमला
सरबजीत सिंह 26 अप्रैल 2013 तक उच्च सुरक्षा वाली जेल में बंद रहे, जब उन पर अमीर सरफराज तांबा सहित अन्य कैदियों ने हमला किया. कैदियों के एक समूह ने मैटल की शीट, लोहे की रॉड, ईंटों और टिन के टुकड़ों से उनके सिर पर हमला किया, जिसके बाद उन्हें गंभीर दिमागी चोट आई, रीढ़ की हड्डी टूट गई और वो कोमा में चले गए. उन्हें लाहौर के जिन्ना अस्पताल ले जाया गया. वहीं डॉक्टरों ने चेतावनी दी थी कि उनके ठीक होने की संभावना नहीं है.



