मस्तूरी क्षेत्र के धर्म नगरी मल्हार मे विश्व विरासत दिवस के अवसर पर मल्हार पुरातत्व समिति की बैठक पातालेश्वर मंदिर प्रांगण में संपन्न हुई जिसमें प्रागैतिहासिक नगर (मल्हार) मलार के पूरा संप्रदा प्राचीन गढ़, तालाबों की स्थिति एवं विभिन्न संस्कृतियों पर विस्तृत चर्चाएं की गई। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा पातालेश्वर कल्प केदारनाथ एवं भीम- कीचक (देऊर मंदिर) को संग्रहित किया गया है एवं सुरक्षा हेतु कर्मचारी भी रखे गए हैं जो नाकाफी है। यहां प्राचीन गढ़ में खुदाई कराई गई थी जिसमें 2000 वर्ष पुराने भवन मिले हैं, जबकि उनकी सुरक्षा हेतु अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए, यहां चौकीदार नहीं होने के कारण कई आपराधिक घटनाएं होती रहती है और असामाजिक तत्व के लोग बाउंड्री वॉल को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। कभी मलार में 126 तालाबें हुआ करते थे वर्तमान में मात्र 80 तालाब ही रह गए हैं वह भी तेजी से अतिक्रमण के भेंट चढ़ते हुए विलोपित हो रहे हैं। मेला स्थल स्थित कनकन कुआं, एवं पुराने ऐतिहासिक ध्वस्त हुए निर्माण को सुरक्षित करने की आवश्यकता है ताकि वह भविष्य के लिए सुरक्षित रहे। देऊर मंदिर एवं पातालेश्वर मंदिर परिसर में रखे हुए प्राचीन महत्वपूर्ण मूर्तियों को संरक्षित करना जरूरी है ताकि वह नष्ट ना हो अभी खुलें धूप-वर्षा में इनका लगातार क्षरण हो रहा है। इसमें पंचमुखी गणेश जी की विशाल प्रतिमा, अर्धनारीश्वर एवं राज पुरुष की भव्य प्रतिमाएं सहित अनेक देवताओं की मूर्तियां शामिल है। बैठक में ओमप्रकाश पांडे, अकतराम सिन्हा, शेषनारायण गुप्ता, रविंद्र वैष्णव, राजेश पांडे एवं राज किशोर पांडे शामिल हुए। सभी ने एक मत से निर्णय लिया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों को उक्त बावत ज्ञापन देंगे एवं निराकरण की मांग करेंगे।
यह जानकारी ओम प्रकाश पांडेय ने दी।



