पुसौर
यह तो तय है कि एक अदृश्य षक्ति या युं कहे कि परा प्रकृति एवं पुरूश प्रकृति के द्वारा यह भुमंडल संचालित है जिनके अवतारों का भान करते हुये हृदय आंदोलित होता है और अच्छे व विशम परिस्थिति में लोग इन्हें याद करते हैं जिसे जानने समझने अथवा कुछ दिन इसके सानिध्य लाभ प्राप्त करने का अवसर उसे ही प्राप्त होता है जिसे परम पिता परमेष्वर की कृपा के साथ साथ पितरों की कृपा हो। इस तरह की कृपा कौवाताल के पूर्व सरपंच कुंजराम पटेल को होने से इन दिनों इनके अगुवाई में भागवत कथा का प्रारंभ हुआ है जिसमें बिते 27 मई सोमवार को कलष यात्रा, मंगलवार को देवी पुजन के साथ भागवत महात्म्य तथा बुधवार को परीक्षित व कपिल चरित्र का कथा वाचन हुआ है। इसी कडी में गुरूवार को ध्रुव, भरत व प्रहल्लाद चरित्र, षुक्रवार को वामन चरित्र, श्रीराम कथा व कृश्ण जन्म, षनिवार को बाललीला, गोवर्धन लीला व छप्पन भोग, रविवार को गोपी गीत, महारास लीला एवं रूकमिणी विवाह, सोमवार को सुदामा चरित्र षुकदेव विदाई तथा 4 जुन मंगलवार को तुलसी वर्शा, हवन, पुर्णाहुति, महाआरती व भंडारा के साथ संपूर्ण कथा संपन्न होगा। चल रहे संगीतमय भागवत कथा के बीच केवल कौवाताल ही नहीं बल्कि आसपास के ग्राम के श्रद्धालु इसका रसास्वादन कर रहे हैं। उच्च तापमान को ध्यान में रखते हुये आये सभी श्रद्धालुओं के लिये कुंजराम पटेल एवं उनका परिवार हरसंभव व्यवस्था देने की कोषिष की है जिसमें कि वो आराम से कार्यक्रम का लाभ उठा सके। उल्लेखनीय है कि उक्त भागवत कथा के कथाव्यास पं. अवधेष महाराज एवं यज्ञाचार्य पं. खिलेष महाराज जी है जिनके सुमधुर गायन एवं कथा से समुचा क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है इसलिये इन दिनों एक दुसरे से मुखाति होने अथवा किसी बिन्दु पर प्रकाष डालने के लिये पहले राधे-राधे का उच्चारण कर रह हैं। जिसका पालन कुंजराम पटेल पहले से करते आ रहे हैं। ऐसे स्थिति में यह तो तय है कि कोई राधे-राधे बोलकर कोई अपनी दृश्प्रवृत्ति को अंजाम नहीं दे सकता चूंकि राधे-राधे श्रद्धा, प्रेम और विष्वास के वो बोल है जो प्राणिमात्र को एक दुसरे को बांधे रखने में मददगार साबित होता है।



