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World Social Media Day 2024: सोशल मीडिया दिवस,क्यों मनाया जाता है , क्या है इसके पीछे का इतिहास

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World Social Media Day 2024: Why is Social Media Day celebrated, what is the history behind it

World Social Media Day 2024: हर साल 30 जून को दुनियाभर में सोशल मीडिया डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य सोशल मीडिया के बढ़ते महत्व को उजागर करना है, जो बीते कुछ सालों में एक महत्वपूर्ण संचार उपकरण के रूप में उभरा है। यह दिन उन तमाम उपलब्धियों और अनगिनत पैंतरों को याद करने के लिए समर्पित है, जिनसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने हमारे जीवन को प्रभावित किया है। साथ ही, यह सोशल मीडिया की कमियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का भी एक अच्छा अवसर है।

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सोशल मीडिया डे का इतिहास

पहला सोशल मीडिया डे 30 जून 2010 को मनाया गया था। इस दिन की शुरुआत वैश्विक संचार में सोशल मीडिया की भूमिका और महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से की गई थी। साल 1997 में एंड्रयू वेनरिच ने पहली सोशल नेटवर्किंग साइट SixDegrees लॉन्च की थी। इसके बंद होने के बाद, फ्रेंडस्टर, माइस्पेस और फेसबुक जैसी साइटों के माध्यम से लोग संचार करने लगे। इसके बाद, ट्विटर, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन और स्नैपचैट जैसी कई अन्य सोशल मीडिया साइट्स ने भी इंटरनेट की दुनिया में कदम रखा।

सोशल मीडिया डे का महत्व

सोशल मीडिया ने हमें सरहदों से परे सफर करने में सक्षम बनाया है। आज हम घर बैठे ही दुनिया के किसी भी कोने से लोगों से बात कर सकते हैं। लोगों से संपर्क करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। मगर सोशल मीडिया के कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हैं, जैसे फेक न्यूज का प्रसार, गोपनीयता की समस्या और साइबर बुलिंग।

सोशल मीडिया के फायदे और नुकसान

सोशल मीडिया डे समाज के लाभ के लिए सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग करने और इसके माध्यम से होने वाले तमाम मुद्दों के बारे में लोगों को जागरूक करने का अवसर प्रदान करता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि कैसे हम सोशल मीडिया का सही उपयोग कर सकते हैं और इसके नकारात्मक प्रभावों से बच सकते हैं। इस दिन का महत्व यह भी है कि यह हमें यह सोचने का अवसर देता है कि कैसे सोशल मीडिया ने हमारे जीवन को बदल दिया है और हम इसे और अधिक सकारात्मक और सुरक्षित कैसे बना सकते हैं।

विश्व सोशल मीडिया दिवस का क्या है इतिहास

दरअसल, सोशल मीडिया दिवस दुनियाभर में प्रतिवर्ष 30 जून को मनाया जाता है. इस दिन की स्थापना 2010 में मैशेबल नामक एक वैश्विक मीडिया और प्रौद्योगिकी कंपनी द्वारा की गई थी, ताकि दुनियाभर में संचार पर सोशल मीडिया के गहन प्रभाव को पहचाना जा सके. हालांकि, सोशल मीडिया की शुरुआत 1997 में सिक्सडिग्री जैसे प्लेटफॉर्म के लॉन्च के साथ हुई थी, जिसने यूजर्स को प्रोफाइल बनाने और दोस्तों से जुड़ने की अनुमति दी थी. साल 2001 में इसके दस लाख से अधिक यूजर्स हो चुके थे उसके बावजूद भी इसे बंद कर दिया गया.

मौजूदा समय का सोशल मिडिया

पिछले कुछ सालों में सोशल मीडिया इकोसिस्टम का तेजी से विस्तार हुआ है जिसमें फेसबुक, लिंक्डइन, माईस्पेस, यूट्यूब, ट्विटर, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, स्नैपचैट, टिकटॉक और अन्य प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म उभर कर सामने आए हैं. आज देश में तेजी से बढ़ते यूजर बेस के साथ सोशल मीडिया भारत में लोगों के जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है. आपको जानकारी के लिए बता दें कि वर्ल्ड स्टैटिक्स के अनुसार, भारतीय प्रतिदिन औसतन 2.36 घंटे सोशल मीडिया पर बिताते हैं.
जबकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को डेटा प्राइवेसी और गलत सूचना जैसे मुद्दों पर बढ़ती जांच का सामना करना पड़ रहा है, विश्व सोशल मीडिया दिवस इन डिजिटल स्थानों के सकारात्मक पहलुओं पर विचार करने और उनके उपयोग के लिए एक संतुलित, जिम्मेदार दृष्टिकोण के लिए प्रयास करने का एक अनुस्मारक है.

सोशल मीडिया दिवस का महत्व

सोशल मीडिया के माध्यम से हजारों मील दूर बैठे व्यक्ति से मैसेज और वीडियो कॉलिंग के जरिए जुड़ सकते हैं. वहीं एक क्लिक में दुनिया की तमाम जानकारी को सोशल मीडिया पर पा सकते हैं. जैसा कि इसका नाम है सोशल मीडिया मतलब समाज का एक माध्यम जिसके जरिए हम समाज में हो रही हर एक घटना से अवगत होते है.
सोशल मीडिया के जरिए ही सिटीजन जर्नलिजम यानी की नागरिक पत्रकारिता संभव हो पाया है. सारे पीआर एजेंसी सोशल मीडिया को एक हथियार की तरह यूज कर रहे हैं. निर्भया केस के आरोपियों को सोशल मीडिया के कारण ही सजा मिल पाई. सोशल मीडिया के कारण ही साल 2014 में बेजेपी जन-जन तक पहुंची और केन्द्र में अपनी सरकार बना पाई.

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