A woman had ordered momos worth Rs 133, when she did not get the delivery, the court ruled that she will now eat them for free for the rest of her life
नई दिल्ली। फूड डिलीवर करने वाली कंपनी जोमैटो (Zomato) पर 60 हजार रुपये का जुर्माना लगा है. कंपनी पर ये जुर्माना 133 रुपये के मोमोज डिलीवर नहीं करने के कारण लगा है. कर्नाटक के कंज्यूमर फोरम ने कंपनी पर जुर्माना लगाते हुए कहा कि उसकी वजह से याचिकाकर्ता महिला को मानसिक रूप से पीड़ा का सामना करना पड़ा है. याचिकाकर्ता ने बार-बार कंपनी से इसकी शिकायत की, लेकिन उनकी तरफ से इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया तो महिला ने कंज्यूमर फोरम में याचिका दायर की.
महिला ने कंज्यूमर फोरम में शिकायत से पहले जोमैटो को अपनी समस्या बताई थी और उन्हें 72 घंटे में समाधान का आश्वासन दिया गया, लेकिन कोई रिस्पोंस नहीं आया. तब महिला ने कंज्यूमर फोरम में शिकायत दर्ज कर दी. सुनवाई के दौरान जोमैटो के वकील जीएम कंसोगी ने महिला के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनका रेस्टोरेंट और डिलीवरी एजेंट से कानूनी तौर पर कोई कनेक्शन नहीं है. इस पर आयोग ने कहा कि 72 घंटे के बाद भी जोमैटो की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर संदेह पैदा होता है.
शीतल को इस साल 2 मई को जोमैटो से ₹133.25 का मुआवजा मिला। हालांकि, आयोग ने कहा कि फ़ूड डिलीवरी ऐप ने महिला को खराब सेवा प्रदान की, जिससे उसे मानसिक तनाव और पीड़ा हुई।
कहा कि जोमैटो ग्राहक द्वारा दिए गए ऑनलाइन ऑर्डर के जवाब में सामग्री की आपूर्ति का अपना व्यवसाय कर रहा है। पैसा मिलने के बावजूद, जोमैटो ने शिकायतकर्ता को फूड पैकेट नहीं दिया।
72 घंटे तक नहीं आया जवाब, तब महिला ने….
इसके बाद महिला ने ईमेल के जरिए जोमैटो से शिकायत की और जवाब आया उन्हें 72 घंटे तक इंतजार करना पड़ेगा, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। तब महिला ने फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म को एक कानूनी नोटिस भेज दिया।कोर्ट में पहले वकील ने महिला को ही झूठा बना दिया था, लेकिन जब महिला ने कोर्ट में शिकायत करने वाला सबूत पेश किए तो ये साबित हो गया कि महिला सच बोल रही है।
जोमैटो की ओर से किया गया इतना रिफंड
इसके बाद इस साल 18 मई को शीतल ने जानकारी दी कि उन्हें जौमेटो की ओर से 133.25 रुपए का रिफंड कर दिया गया है। जोमैटो को शीतल को मानसिक तनाव के लिए मुआवजे के रूप में 50,000 रुपये और उसके कानूनी खर्चों को कवर करने के लिए 10,000 रुपये देने का आदेश दिया गया, जिसके बाद कुल राशि 60,000 रुपये हो गई।



