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म्यूजिक कंपनी के बीच कॉन्ट्रैक्ट को HC ने माना अवैध, Shehnaaz Gill को पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट से राहत,

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HC declared the contract between the music company illegal, Shehnaaz Gill got relief from Punjab-Haryana High Court,

चंडीगढ़। अभिनेत्री शहनाज गिल (Actress Shehnaaz Gill) और एक म्यूजिक कंपनी के बीच वर्क कॉन्ट्रैक्ट को लेकर हुए विवाद का पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने निपटारा किया है। हाई कोर्ट ने कहा है कि कॉन्ट्रैक्ट की स्वतंत्रता अनुबंध करने वाले पक्षों के बीच समानता और सौदेबाजी की शक्ति पर आधारित होनी चाहिए।

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प्रथम दृष्टया विचाराधीन समझौते की शर्तें अनुचित: हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में प्रथम दृष्टया विचाराधीन समझौते की शर्तें अनुचित हैं और इसका कारण यह है कि एक पक्ष के पास बेहतर सौदेबाजी की शक्ति है और दूसरा पक्ष बहुत ही निम्न स्थिति में है। इसलिए समझौते को प्रथम दृष्टया वैध नहीं माना जा सकता है। साथ ही इसे वादी (शहनाज गिल) के लिए बाध्यकारी नहीं कहा जा सकता है।

शहनाज के पक्ष में पारित आदेश को मिली थी चुनौती

जस्टिस गुरबीर सिंह ने गायिका और अभिनेत्री शहनाज कौर उर्फ शहनाज गिल के खिलाफ सज्जन कुमार दुहन और एक अन्य द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश पारित किए हैं। अपीलकर्ता ने मोहाली की एक स्थानीय अदालत में शहनाज के पक्ष में पारित 29 अगस्त 2023 के आदेश को चुनौती दी थी।

अपीलकर्ता सिमरन म्यूजिक इंडस्ट्री का मालिक

अपीलकर्ता सिमरन म्यूजिक इंडस्ट्री का मालिक था। शहनाज ने उसके साथ कई गाने और म्यूजिक वीडियो में परफॉर्मेंस किया है। जिसमें एक गाना वेहम भी शामिल है, जिसे वर्ष 2019 में रिकॉर्ड किया गया था। वर्ष 2019 में ही शहनाज को रियलिटी टीवी शो बिग बॉस सीजन 13 में प्रतिभागी के रूप में आमंत्रित किया गया था। जिसके लिए उन्होंने 27 सितंबर, 2019 को बिग बॉस हाउस में प्रवेश किया था।

बिग बॉस हाउस में जाने से पहले शहनाज ने किए थे हस्‍ताक्षर

आगे यह भी तर्क दिया गया कि बिग बॉस हाउस में प्रवेश करने से ठीक दो दिन पहले इस मामले में अपीलकर्ता ने उनसे अनुरोध किया और उनसे भविष्य में उनके कामकाजी संबंधों के संबंध में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने का अनुरोध किया। बार-बार अनुरोध करने पर उन्होंने जल्दबाजी में उस पर हस्ताक्षर किए और बिग बॉस हाउस के लिए रवाना हो गईं।

शहनाज गिल को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से मिली राहत

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सोमवार को अपीलीय अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। जिसमें कहा गया था कि गायिका शहनाज गिल (Shehnaaz Gill) को केवल एक संगीत कंपनी के लिए गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। जिसके साथ उन्होंने 2019 में हस्ताक्षर किए थे। अदालत ने कहा कि- शर्तें अनुचित थी तथा उनमें समान सौदेबाजी की शक्ति का अभाव था।

क्या था पूरा मामला

शहनजा गिल (Shehnaaz Gill) ने Bigg Boss 13 में प्रवेश करने से पहले 2019 में सिमरन म्यूजिक कंपनी के साथ जल्दबाजी में अनुबंध किया। शर्तों के अनुसार- शहनाज गिल (Shehnaaz Gill) को किसी अन्य कंपनी के लिए गाने की अनुमति नहीं थी। न्यायमूर्ति गुरबीर सिंह ने कहा- “प्रतिवादी कंपनी, संगीत उद्योग में अपनी साख और प्रतिष्ठा के कारण, उच्च स्थान पर है, जबकि उद्योग में अपनी जगह बनाने का सपना देख रही थी और तदनुसार, अपने सपनों को पूरा करने के लिए, उसने समझौते में उल्लिखित अनुचित शर्तों को स्वीकार कर लिया।”
अदालत ने आगे कहा कि इस मामले में, प्रथम दृष्टया, विचाराधीन समझौते की शर्तों अनुचित थीं और इसका कारण यह था कि एक पक्ष के पास बेहतर सौदेबाजी की शक्ति थी, जबकि दूसरे पक्ष की स्थिति बहुत निम्न थी तथा सौदेबाजी की शक्ति बहुत कम थी।

जस्टिस गुरबीर सिंह ने कहा,

“प्रतिवादी कंपनी, संगीत उद्योग में अपनी सद्भावना और प्रतिष्ठा के कारण उच्च स्थान पर है, जबकि वादी, जो एक महत्वाकांक्षी गायिका थी, संगीत उद्योग में अपनी जगह बनाने का सपना देख रही थी और तदनुसार, अपने सपनों को पूरा करने के लिए, समझौते में उल्लिखित अनुचित शर्तों को स्वीकार कर लिया।”

प्रस्तुतियां सुनने के बाद न्यायालय ने कहा,

“यह कानून का स्थापित सिद्धांत है कि नकारात्मक नियम, रोजगार की अवधि के दौरान प्रभावी होती हैं जब कर्मचारी विशेष रूप से नियोक्ता की सेवा करने के लिए बाध्य होता है, उन्हें व्यापार का प्रतिबंध नहीं माना जाना चाहिए, और इसलिए, वे भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 की धारा 27 के अंतर्गत नहीं आते हैं।”

इसने आगे कहा,

“समझौते की शर्तों के अनुसार, प्रतिवादियों को प्रत्येक वर्ष वादी के चार आधिकारिक ऑडियो और वीडियो बनाने थे। प्रतिवादियों ने न तो कोई कदम उठाया और न ही वादी को अनुबंध के अपने हिस्से का प्रदर्शन करने के लिए कोई नोटिस दिया।

ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिवादियों ने दिसंबर 2020 में वादी के नोटिस को स्वीकार कर लिया था, जिसके तहत वादी ने प्रतिवादियों को सूचित किया कि उसने समझौते को रद्द कर दिया है। प्रतिवादियों ने उक्त अवधि के दौरान वादी के कामकाज में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप नहीं किया और वादी को स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति दी। प्रतिवादियों की चुप्पी प्रथम दृष्टया यह स्थापित करती है कि उन्होंने वादी द्वारा बताए गए अनुसार समझौते को रद्द मान लिया था।”

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