IAS Puja Khedkar: This eye disease, IAS Pooja Khedkar is also suffering from depression, claims in medical report
महाराष्ट्र की प्रोबेशनरी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. उनके सर्टिफिकेट से लेकर मेडिकल रिपोर्ट तक पर सवाल उठ रहे हैं. लेकिन अब एक मेडिकल रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि पूजा खेडकर को आंखों की एक खास बीमारी थी. इतना ही नहीं, पूजा डिप्रेशन की भी शिकार थीं.
आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर ने यूपीएससी की परीक्षा में विकलांगता के आधार पर लाभ लिया. इसके लिए कम से कम 40 फीसदी विकलांग होना जरूरी है. लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि उनकी विकलांगता सिर्फ 7 फीसदी है. इतना ही नहीं, 2007 में एक निजी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेते समय उन्होंने जो मेडिकल सर्टिफिकेट जमा किया, उसमें उन्हें मेडिकल तौर पर फिट बताया गया. ये भी कहा गया कि उनमें कोई बड़ी विकलांगता नहीं है.
अस्पताल के सर्जन ने क्या कहा
अब इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अहमदनगर जिला अस्पताल के आई सर्जन डॉ. एस वी रस्कर ने 25 अप्रैल, 2018 को पूजा खेडकर की जांच की थी. तब उन्होंने पाया था कि पूजा 40 प्रतिशत स्थायी विकलांगता के साथ बीई हाई मायोपिया और मायोपिक डिजनरेशन’ से पीड़ित थीं. इसी के आधार पर उन्हें विकलांगता प्रमाण पत्र जारी किया गया था. अहमदनगर जिला सिविल सर्जन डॉ. संजय घोगरे ने बताया कि पूजा के 51 प्रतिशत विकलांग होने की रिपोर्ट डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर एस सलीमथ को सौंपी गई है. आज यह रिपोर्ट नासिक के संभागीय आयुक्त को भी सौंप दी जाएगी.
ऐसी बना 51% विकलांगता सर्टिफिकेट
मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, पूजा खेडकर की दोनों में आंखों में मायोपिक डिजनरेशन पाया गया. इससे दृष्टि कमजोर हो जाती है. यह लगभग 40 फीसदी था. वह मानसिक तौर पर बीमार थीं और 20 फीसदी डिप्रेशन पाया गया. इसलिए उन्हें 51% विकलांग होने का सर्टिफिकेट जारी किया गया. पूजा खेडकर ने इसी आधार पर यूपीएससी में दावा किया था कि वे दृष्टिबाधित और मानसिक रूप से बीमार हैं. इसी आधार पर उन्हें तमाम तरह की छूट दी गई. परीक्षा में कम अंक होने के बावजूद उन्हें पास कर दिया गया.
पहले किया गया था ट्रांसफर
पूजा खेडकर के आचरण पर विवाद के बाद उनकी ‘विकलांगताओं’ पर सवाल उठाए गए थे, जिसके कारण उन्हें पुणे से वाशिम ट्रांसफर कर दिया गया था। अहमदनगर जिला अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने पूजा खेडकर को क्रमशः 2018 में दृश्य विकलांगता प्रमाण पत्र और 2021 में मानसिक विकलांगता प्रमाण पत्र जारी किया था।
तत्कालीन बोर्ड ने उन्हें 2021 में चिकित्सा विकलांगता के लिए एक जॉइंट प्रमाणपत्र भी जारी किया था। नई मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि इन प्रमाणपत्रों को वेरीफाई किया गया और यह निष्कर्ष निकाला गया कि वे सही थे।
2018 में मिला था प्रमाणपत्र
नई रिपोर्ट के अनुसार आई स्पेशलिस्ट डॉ. एसवी रास्कर ने 25 अप्रैल, 2018 को पूजा खेडकर की जांच की थी और प्रमाणित किया था कि वह 40 प्रतिशत स्थायी विकलांगता के साथ बीई हाई मायोपिया से पीड़ित थी। इसके बाद उन्हें विकलांगता प्रमाणपत्र जारी किया गया। बाद में 18 जनवरी 2021 को, मनोचिकित्सक डॉ. योगेश गाडेकर और मनोवैज्ञानिक मीनल काटकोल द्वारा पूजा खेडकर की मनोरोग संबंधी बीमारी की जांच की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय विकलांगता मूल्यांकन और मूल्यांकन पैमाने के तहत उसका मूल्यांकन किया गया और उसे अवसाद से पीड़ित पाया गया।
पूजा खेडकर एक अलग कार्यालय, आधिकारिक कार और अपनी निजी कार पर बत्ती के अनधिकृत उपयोग की कथित मांगों को लेकर सुर्खियों में आईं थीं। इन सभी सुविधाओं की वह हकदार नहीं थीं। केंद्र ने उनके व्यवहार की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया। समिति दो हफ्ते में रिपोर्ट सौंपेगी। पूजा खेडकर को एक प्रमाण पत्र जारी किया गया था जिसमें दोनों आंखों में कम दृष्टि (40 प्रतिशत विकलांगता) और मानसिक बीमारी और ब्रेन डिप्रेशन (20 प्रतिशत विकलांगता) दिखाया गया था।



