Government and society need to come forward to protect cows
पुसौरः हमारी सरकारें आये दिन गोवंषों की रक्षा एवं उसके विकास के लिये कई तरह के योजनायें लाकर लोगों को इससे जोडने का प्रयास किया है जिसमें अब तक कहीं सफलता नहीं मिलने की खबर प्रकाष में आया है और षायद यही कारण है कि आज गोवंष चैक चैराहों में खुले में घुमते नजर आ रहे हैं। लगभग 4 दषक पुर्व प्रायः प्रत्येक घरों में किसी न किसी प्रकार का पालतु पषु जरूर मिलता था चूंकि यह लोगों के मान सम्मान में मददगार साबित होता था। खेत वहीं हैं किसानों और किसानी का स्वरूप बदला है, कंपनीयों की स्थापना से आजीविका का साधन बदला है ऐसे स्थिति में मवेषी अब पालतु नहीं रहे और वो मान सम्मान से बाहर होने लगे हैं फलतः आज गोवंष चैक चैराहों में बेमालिक घुम रहे हैं जो कभी अपने मालिक पर इतराते थे। इसके बावजुद भी लोग मलाईदार चाय, देषी षुद्ध घी और षुद्ध खोयें के पेडे अपेक्षा करते हैं और उन्हें मिल भी रहा है क्या वास्तव में वो जैविक दुध के हो सकते हैं?



