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विष्णुदेव साय की सरकार बेपटरी हो चुकी है, मुख्यमंत्री का नियंत्रण सरकार पर नहीं है- विक्रम मंडावी

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Vishnudev Sai’s government has derailed, the Chief Minister has no control over the government – Vikram Mandavi

बलरामपुर घटना की जांच उच्च न्यायालय के जज की निगरानी में हो – विक्रम मंडावी

Ro.No - 13672/156

बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार सोमवार को जिला मुख्यालय बीजापुर में जिला कांग्रेस कमेटी ने प्रेस वार्ता कर कहा कि प्रदेश में जब से भाजपा की सरकार बनी है तब से छत्तीसगढ़ जैसे शांत प्रदेश अपराध का गढ़ बनता जा रहा है। प्रेस वार्ता में प्रदेश के बलरामपुर की घटना को लेकर बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि बलरामपुर में पुलिस की कस्टडी में एक युवक गुरूचरण मंडल की मौत हो गयी। पुलिस का दावा है कि मृतक गुरूचरण की मौत बाथरूम में फांसी लगाने से हुई है। सारे तथ्य बताते है बलरामपुर में युवक गुरूचरण मंडल की मौत पुलिस की पिटाई से हुई है। मृतक जिसकी पत्नी 29 सितंबर को लापता हो गई थी। गुरूचरण मंडल को उसके पिता के साथ उसकी पत्नी के लापता होने के संबंध में पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन बुलाया गया था। मृतक के परिजनों का कहना है कि “पुलिस ने 4 दिनों से उसे तथा उसके पिता को थाने बुलाया था तथा 4 दिनों से उसे थाने में हिरासत में रखा था। पिछले 20 दिनों से मेरी बहू लापता है और मैं अपने बेटे के साथ तीन दिनों से हिरासत में हूं। पुलिस ने हमें बेरहमी से पीटा। बलरामपुर पुलिस की वजह से मैंने अपने बेटे को खो दिया।” प्रेस वार्ता में विधायक विक्रम मंडावी ने भाजपा की विष्णुदेव साय सरकार से सवाल पूछते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को पुलिस 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में नहीं रख सकती। गुरूचरण मंडल, उनके पिता तथा एक अन्य को चार दिनों तक थाने में हिरासत में क्यों रखा गया ? 24 घंटे के भीतर कोर्ट में क्यों प्रस्तुत नहीं किया गया ? मृतक के पास टॉवेल (तौलिया) कहां से आया जबकि उसके पिता का कहना है उसके पास कोई टॉवेल नहीं थी ? मृतक के शरीर का पंचनामा परिजनों व परिचितों के सामने क्यों नहीं किया गया ? मृतक के परिजन शव को दफनाने की मांग कर रहे थे, पुलिस जलाना क्यों चाहती थी ? हालांकि बाद में दबाव के कारण दफनाया गया। मृतक के शव को थाने से अस्पताल ले जाते उसके पिता ने देखा लेकिन उसके मौत की जानकारी थाने में उनको क्यों नहीं दिया गया ? इस मामले की उच्च न्यायालय के जज की निगरानी में जांच कराया जाये। इस पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी तथा टीआई की भूमिका संदिग्ध है, उन सबके खिलाफ तत्काल कार्यवाही की जाये। मृतक के शरीर का डॉक्टरों का दल बना कर फिर से पोस्टमार्टम कराया जाये। मृतक के परिवार को 1 करोड़ मुआवजा दिया जाये। प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था की नैतिक जिम्मेदारी लेकर मुख्यमंत्री इस्तीफा दे, गृह मंत्री को बर्खास्त किया जाये। ऐसी नकारी और निक्कमी सरकार को तत्काल बर्खास्त कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाना चाहिये। सरकार चलाने वाले कानून व्यवस्था को नहीं संभाल पा रहे है। प्रेस वार्ता में विधायक विक्रम मंडावी ने आगे कहा कि सरकार की विफलता की जवाबदेही मुख्यमंत्री की है। मुख्यमंत्री का नियंत्रण सरकार पर नहीं है। सरकार बेपटरी हो चुकी है। 4 एसपी और कलेक्टर, दर्जनों वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को हटाने के बाद भी सरकार कानून व्यवस्था नहीं संभाल पा रही तब मुख्यमंत्री, गृह मंत्री को हटाने में क्यों हिचकिचा रहे है? मुख्यमंत्री को ऐसा लगता है कि उनके गृह मंत्री की गलती नहीं है तो सरकार की नाकामी की जिम्मेदारी खुद लेकर तत्काल इस्तीफा दें। प्रेस वार्ता के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष शंकर कुडियम, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष लालू राठौर, जिला पंचायत सदस्य नीना रावतिया उद्दे समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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