Heart touching Omkar sound in the self-created Shiva temple Chhapora
पुसौर / पुसौर क्षेत्र के ग्राम कलमी स्थित स्वयंभू बाबा गुप्तेष्वर मंदिर के तर्ज में ग्राम छपोरा को भी माना जाता है किंवदंतियो और मान्यता के मुताविक उक्त मंदिर में चढायें गये फुल प्रसाद आदि पोरत के मंदिर में दिखते थे। कुछ बडे बुजुर्ग यह भी बताते है कि उक्त छपोरा के षिव मंदिर में कछुये एवं गोहे अक्सर मिलते रहते थे। मंदिर के पास स्थित नाला षायद उपरोक्त बताये गये तथ्यो को पुश्टी कर सकता है। उक्त षिव मंदिर आस पास के दर्जनों ग्रामों के लोगों का आस्था एवं विष्वास का केन्द्र बना हुआ है जिसके फलस्वरूप प्रत्येक पर्वो में निष्चित ही अपनी सेवा श्रद्धा अर्पण ये लोग करते रहे हैं। इस तथ्य को कई ग्रामीणों ने बताया कि जब भी यहां आकर कोई अपनी समस्या के निदान के लिये निवेदन किया है वह फलीभुत हुआ। छपोरा के मालगुजार पुत्र रामेष्वर चैधरी ने बताया कि उक्त मंदिर का देख रेख उनके दादा जी के जमाने से चला आ रहा है। इनके स्व. पिता राधेष्याम चैधरी ने उक्त षिवालय में श्रद्धा और विष्वास को बनाये रखने हरसंभव प्रयास किया और रामेष्वर चैधरी एवं उनके परिवारजन तथा टीम के लोगों द्वारा यहां पहुंच रहे श्रद्धालुओं व भजन पार्टीयांें का समुचा आदर सम्मान रखा जा रहा है। षिवरात्रि पर्व पर उक्त मंदिर में जल चढाने श्रद्धालु की लंबी कतार इस बात की पुश्टी करती हैं इसकी मान्यता क्षेत्र के लोगों में बढ चढ कर है इसी कारण इस दिन भजन मंडलिया ओम नमः षिवाय और रामचरित मानस आदि का सस्वर गायन करते रहे हैं वहीं सभी भक्तजनों को अन्न प्रसाद का भी समुचित व्यवस्था मिलती है जिसे यहां के ट््रस्टी के रूप में कार्य कर रहे रामेष्वर चैधरी एवं उनके साथ सहयोगी मुर्तरूप देते हैं।



