Change your perspective, change your perspective, then women will be safe: Somti Sidar
पुसौर / पिछले कई वर्शो से महिला सुरक्षा के मद्देनजर षासन एवं समाज स्तर पर बडे बडे कार्यक्रम होते रहे हैं जिसमें उस दिन नारी को जो दर्जा दी जाती है उसका यदि 10 प्रतिषत भी समाज के लोगों द्वारा पालन की जाती तो षायद आज अवयस्क बालिकाएं प्रदेष से गायब नहीं रहती, जगह जगह महिलाओं से जुडे कोई घृणित केष दर्ज नहीं होते इन सब तथ्यों को लेकर कांदागढ के पुर्व सरपंच एवं आदिवासी समाज के प्रखर महिला नेतृ श्रीमती सोमती सिदार का कहना है कि यू तो हर सिक्के के दो पहलू होते है ये जीवन या ये संसार किसी एक का नही महिला और पुरुष दोनों मिलकर ही इस दुनियां को आगे बढ़ाते हैं। कोई एक से नही लेकीन लोग समझते हैं की मै ही मै हूं नारी तो मेरे पैरों की जूती है या दासी है। लेकिन 8मार्च को ही पुरूष समाज को नारी मे ये सारे गुण नजर आते है कि मां बेटी बहन घर की शान है जो ममतामई, साहसी और ना जाने क्या क्या कहकर तारीफो के पुल बांधते हैं उसके बाद जैसे ही 9 मार्च की सुबह होती है वैसे ही वही महिलाएं जो लड़की घर से बाहर जाती है वो कुलक्षणी बन जाती है। एक विधवा महिला अपसकुन हो जाती है। वही ममतामयि मां घर के लिए बोझ बन जाती है। वही पत्नी घर की लक्ष्मी से डायन बन जाती है। और न जाने क्या क्या बन जाती है। जैसे ही होली का त्योहार आयेगा चिल्ला चिल्ला कर महिलाओं को बेइज्जत करेंगे उससे भी जी नही भरा तो जला कर खुशियां मनाएंगे। यही पुरूष प्रधान समाज का घृणित सोच है जो चेहरे पर नकाब पहन कर महिलाओं को धोखा देते हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
नारा से कुछ नहीं होगा ये कागज में या सरकारी योजना में महिलाओं को सम्मान देने से कुछ नहीं होने वाला, जब तक पुरूष के मन से नारी के प्रति गलत धारणा है। तब तक महिला सशक्तिकरण एक धोखा ही है। नजर को बदलो तो नजरिया बदलेगी। सोच को बदलोए तो समाज बदलेगी। जब नारी के बिना पुरूष अधुरा और पुरूष के बिना नारी अधूरी। एक दूसरे के बिना इस संसार का विकाश अधूरा है। फिर पुरूष बेहतर और नारी कमजोर कैसे।



