Survey work started under Pradhan Mantri Awas Yojana, the duration of the scheme extended till 2028-29
2011 एवं 2018 की सर्वे सूची में छूटे पात्र हितग्राहियों का किया जाएगा पंजीयन
ग्रामीण क्षेत्रों में आवास प्लस मोबाइल एप से किया जाएगा सर्वे
उत्तर बस्तर कांकेर, 11 मार्च 2025/ भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का विस्तार अब वर्ष 2028-29 तक कर दिया गया है, इसके तहत सर्वे का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत नए पात्र हितग्राहियों के चयन हेतु सर्वे का कार्य प्रारंभ हो गया है। उन्होंने बताया कि इसमें ऐसे लोगों को शामिल किया जाएगा, जिनके नाम वर्ष 2011 और 2018 की सर्वे सूची से छूट गए हैं। सीईओ श्री मंडावी ने यह भी बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र परिवारों का सर्वेक्षण आवास प्लस मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से कराया जाएगा। इसके लिए ग्राम पंचायत सचिव, रोजगार सहायक तथा आवास मित्रों को प्रगणक के तौर पर नियुक्त किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया कि कोई पात्र परिवार सर्वे से छूट जाता है तो वे अपने ग्राम पंचायत सचिव, रोजगार सहायक तथा आवास मित्र से सम्पर्क कर सर्वे का कार्य पूर्ण करा सकते हैं। जिला सीईओ ने बताया कि आवास प्लस 2024 सर्वे के लिए आवेदक स्वयं अपना पंजीयन करा सकते हैं। इसके लिए किसी भी एंड्रायड मोबाइल के गूगल प्ले स्टोर का उपयोग करके AawaasPlus 2024 नामक एप को डाउनलोड किया जा सकता है।
पीएमएवाय की पात्रता के लिए निर्धारित मापदंड :-
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण हेतु सर्वे कार्य प्रारंभ हो चुका है, इसके लिए परिवार/हितग्राही की पात्रता के लिए शासन द्वारा निर्धारित मापदंड इस प्रकार हैं- परिवार/हितग्राही के पास मोटरयुक्त तिपहिया/चौपहिया वाहन न हो। मशीनीकृत तिपहिया/चौपहिया कृषि उपकरण न हो। 50 हजार रूपए अथवा इससे अधिक ऋण सीमा वाले किसान क्रेडिट कार्ड न हो। ऐसे परिवार जिनका कोई सदस्य सरकारी कर्मचारी न हो, सरकार के पास पंजीकृत गैर कृषि उद्यम वाले परिवार न हो। ऐेसे परिवार जिनका कोई सदस्य 15 हजार रूपए से अधिक प्रतिमाह न कमा रहा हो। आयकर देने वाले परिवार न हो, व्यवसाय कर (टैक्स) देने वाले परिवार न हो। साथ ही ऐसे परिवार जिनके पास 2.5 एकड़ या इससे अधिक सिंचित भूमि न हो तथा वे परिवार जिनके पास 05 एकड़ या इससे अधिक असिंचित भूमि नहीं होना चाहिए।



