The secretaries’ union came out in the field to demand governmentization
पुसौर / वर्श 1995 से कार्यरत पंचायत सचिव जो कि षासकीय सेवकों की तरह षासकीय प्रत्येक कार्यो को क्रियान्वित करने में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाते आये हैं वहीं उसमें लापरवाही बरते जाने पर षासकीय नियम अनुसार दंड भी भोगते आ रहे हैं ऐसे स्थिति में पंचायत सचिवों का षासकीयकरण न होना इनके प्रति घोर उपेक्षा है जबकि बिते चुनाव मे केन्द्र सरकार का यह वादा था कि सरकार बनते ही षासकीयकरण होगा। इस तथ्य पर एक व्हीडियों क्लीप के जरिये बालोद विधायक श्रीमती संगीता सिन्हा ने प्रदेष के सचिवों के संबंध में कहा कि मोदी की गारंटी के तहत सचिवों का षासकीयकरण होना चाहिये जिसे हमने विधानसभा में उठाया है। सचिवों का हडताल पिछले कई सालों से इसके लिये लगातार जारी है लेकिन मोदी के गारंटी से ये बहुत आष्वस्त थे और डबल इंजन के सरकार बनने के लगभग डेढ साल बाद भी यह मांग पुरा न होपाना कहीं न कहीं सरकार का वादा खिलाफी रवैया है इसलिये इन्हें अनिष्चित कालीन हडताल का रास्ता अपनाना पडा है। ज्ञात हो कि सचिवों के प्रदेष नेतृत्व के आहवान पर समुचे ब्लाक मुख्यालय में सचिवों का हडताल सोमवार से प्रारंभ हो चुके हैं इसी कडी में पुसौर के जनपद कार्यालय के पास 89 पंचायत के सभी सचिव 35 डिग्री तापमान में अपने मांग के लिये हडताल पर बैठे हैं। इनके हडताल से पंचायतों में पानी सफाई सहित अन्य षासकीय कार्य बाधित है वहीं नव निर्वाचित जनप्रतिनिधि जो ग्राम के विकास के लिये ताल ठोक कर सरपंच बीडीसी बने है उन्हें लग रहा है कि विकास के पहले पायदान में ग्रहण लग गया हम जनता के सामने कैसे जाये?



