Sapnai Nala Bridge Construction: Questions raised on two years delay and poor construction…
छह करोड़ की लागत, लेकिन पुल में दरारें!
तुरेकेला से तीउर मार्ग (सपनई नाला) पर बनाया जा रहा पुल निर्माण कार्य सवालों के घेरे में है। 6 करोड़ 27 लाख 42 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति के बावजूद, निर्माण में भारी अनियमितताएं सामने आ रही हैं।
निर्माण में दो साल की देरी, फिर भी अधूरा काम
निर्माण कार्य का आदेश 8 दिसंबर 2021 को जारी हुआ था, और इसे 7 जनवरी 2023 तक पूरा होना था। वर्षा ऋतु सहित 12 महीने की अवधि में काम पूरा होना चाहिए था, लेकिन अब दो साल से ज्यादा समय बीत चुका है और पुल का निर्माण अभी भी अधूरा पड़ा है।
पियर और स्लैब में दरारें, घटिया निर्माण की पोल खुली
दिसंबर 2024 में स्थानीय खरसिया विधायक, ग्रामीणों और अधिकारियों—अधीक्षण अभियंता एम.एल. यूईके, कार्यपालन अभियंता रमेश कुमार वर्मा, सहायक अभियंता जे.पी. चौधरी, उप अभियंता एस.एस. टांडे और ठेकेदार विशंभर दयाल अग्रवाल ने निर्माणाधीन पुल का निरीक्षण किया। इस दौरान पुल के पियर, स्लैब और स्लैब के खुले भाग में दरारें (क्रैक) पाई गईं। निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद लीपापोती की गई, लेकिन अब भी दरारें स्पष्ट नजर आ रही हैं।
क्या विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत?
स्थानीय लोगों के अनुसार, पुल निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई। गिट्टी, छड़, सीमेंट और रेत की गुणवत्ता संदेह के घेरे में है। बताया जा रहा है कि लगभग एक साल से कंक्रीट ढलाई का काम पूरी तरह बंद पड़ा है, उसमें लगे हुए छड़ों में जंग लग रहा है। जिससे निर्माण कार्य और अधिक प्रभावित हुआ है।
क्या गोवर्धनपुर पुल जैसा हश्र होगा?
जहां पुलों की उम्र 40 से 50 साल होती है, वहीं घटिया निर्माण की वजह से गोवर्धनपुर पुल मात्र 15 साल में ही बंद हो गया। अगर यही स्थिति रही, तो यह पुल भी कुछ ही वर्षों में खतरनाक साबित हो सकता है। इससे सरकार की राशि का अपव्यय होगा और जनता को सुविधाओं से वंचित रहना पड़ेगा।
आखिर जिम्मेदार कौन?
अब सवाल यह है कि—निर्माण के दौरान विभाग क्या कर रहा था? क्या अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से यह लापरवाही हुई?क्या निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया?क्या शासन इस पर कोई कड़ी कार्रवाई करेगा?सरकार और प्रशासन को इस मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाहियां ना हों और जनता की गाढ़ी कमाई का सही इस्तेमाल हो सके।
ठेकेदार को नोटिस दिया गया है। खंभे में नहीं स्लैब में दरारे हैं लोड टेस्ट की तैयारी चल रही है, रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही होगी।
रमेश कुमार वर्मा
कार्यपालन अभियंता, लोक निमाण विभाग सेतु संभाग रायगढ़



