बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – शाला त्यागी और अप्रवेशी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से बीजापुर जिले में “स्कूल वेंडे वर्राट पंडुम 2025” अभियान का शुभारंभ किया गया। कलेक्टर संबित मिश्रा के निर्देश पर शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य है कि उन बच्चों को चिन्हित किया जाए जो किसी कारणवश स्कूल से वंचित हैं, और उनका नामांकन सुनिश्चित कर उन्हें शैक्षणिक सहायता प्रदान की जाए।
अभियान की शुरुआत से पूर्व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षा दूतों, स्व-सहायता समूहों की दीदियों एवं शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। 1 मई को भैरमगढ़ में 453 प्रतिभागियों और 2 मई को बीजापुर में 230 प्रतिभागियों ने इन सत्रों में भाग लिया। ‘शिक्षार्थ टीम’ द्वारा आयोजित इन प्रशिक्षणों में प्रतिभागियों को सर्वेक्षण की प्रक्रिया और उनकी जिम्मेदारियों की विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी लखन लाल धनेलिया एवं एपीसी जाकिर खान ने उपस्थितजनों को प्रेरित करते हुए कहा कि यह महज नामांकन का अभियान नहीं, बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने का एक सुनहरा अवसर है। उन्होंने समर्पण और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
आगामी दो दिनों में उसूर और भोपालपट्टनम विकासखंडों में भी इसी प्रकार के प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिससे यह अभियान जिले के सभी क्षेत्रों में समान रूप से प्रभावी रूप से लागू हो सके।
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच को सशक्त बनाने की दिशा में यह अभियान एक अहम कदम है। जिला प्रशासन और शिक्षार्थ टीम इस पहल को प्रभावशाली और समावेशी बनाने हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं। यह अभियान न केवल बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने में मदद करेगा, बल्कि जिले की साक्षरता दर को भी सुदृढ़ बनाएगा।



