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ब्रह्माकुमारीज प्रभु अनुराग भवन कोटमीसुनार में डॉ. रतन मोहिनी दादी जी को साधकों ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि l

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*ब्रह्माकुमारीज में श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान दादी जी के दिव्य कर्तव्यों और सेवाओं को याद कियाl*

*डॉ रतन मोहिनी दादी जी साहस,सेवा त्याग, तपस्या की प्रतिमूर्ति थीं l*

Ro.No - 13672/156

मस्तूरी। ब्रह्माकुमारीज प्रभु अनुराग भवन में कोटमीसुनार, अकलतरी, मधवा, पोड़ी के संस्थान से जुड़े नियमित साधकों ने ब्रह्माकुमारीज़ की पूर्व प्रशासिका डॉ. रतन मोहिनी दादी जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि समर्पित की l इस अवसर पर राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी शशि प्रभा ने दादी जी की विशेषताओं व सेवाओं को याद करते कहा की 25 मार्च 1925 को सिंध हैदराबाद के एक साधारण परिवार में देवी स्वरूप बेटी ने जन्म लिया माता-पिता ने जिनका नाम रखा लक्ष्मी किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि कल यही बेटी अध्यात्म और नारी शक्ति का जगमग सितारा बनकर सारे जग को रोशन करेगी बचपन से आध्यात्म के प्रति लगन और परमात्मा को पाने की चाह में मात्र 13 वर्ष की उम्र में लक्ष्मी ने विश्व शांति और नारी सशक्तिकरण की मुहिम में खुद को झोंक दियाl ब्रह्मकुमारीज़ के संस्थापक यज्ञ पिता ब्रम्हा ने उनका नाम रखा रतन मोहिनी दादी वर्ष 1937 में ब्रह्माकुमारीज़ की स्थापना से लेकर आज तक 87 वर्ष तक यात्रा की साक्षी रही पिछले 40 से अधिक वर्षों में से आप संगठन के ही युवा प्रभाग की अध्यक्ष रही आपके नेतृत्व में युवा प्रभाग द्वारा देश भर में अनेक राष्ट्रीय युवा पदयात्राएं साइकिल यात्रा एवं अन्य अभियान भी चलाए गए lदादी जी के नेतृत्व में 2006 में निकाली गई स्वर्णिम स्वर्णिम भारत युवा पदयात्रा ने ब्रह्मकुमारी के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया 20 अगस्त 2006 में मुंबई से यात्रा का आरंभ किया गया और 29 अगस्त 2006 में तिनसुकिया असम में समापन किया गया युवा पदयात्रा द्वारा पूरे देश में 30हजार किलोमीटर का सफर तय किया गया इसमें 5 लाख से अधिक ब्रह्माकुमार भाई बहनों ने भाग लिया सवा सौ करोड़ लोगों को शांति, प्रेम, एकता, सौहार्द, विश्व बंधुत्व,आध्यात्मिकता,व्यसन मुक्ति और राजयोग का संदेश दिया गया l20 फरवरी 2014 को गुलबर्ग विश्वविद्यालय के 32 में दीक्षांत समारोह में कुलपति प्रोफेसर इटी पुटैया और रजिस्टर प्रोफेसर चंद्रकांत यतनूर के द्वारा राज योगिनी दादी रतन मोहिनी जी को डॉक्टरेट की मानक उपाधि से नमाजा गया उन्हें यह उपाधि विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं के आध्यात्मिक नैतिक और सामाजिक सशक्तिकरण में उनके योगदान के लिए प्रदान की गई इसके अलावा देश-विदेश में कई राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से समय प्रति समय दादी को सम्मानित किया गया l
*ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की मुख्य प्रसाशिका 101 वर्षीय दादी का महाप्रयाण*
ज्ञान सागर की गहराइयों में उतर,उत्तरोत्तर प्रगति करने वाली प्रकृति के पांच तत्वों को अपने वशकर परमात्मा के ज्ञान रतन को अपने में धारण कर समाज के हर वर्ग की प्रेरणा स्रोत, आध्यात्मिक पद चिन्ह बनाने की नायिका आदरणीय दादी जी को हम सभी का शत-शत नमनl

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