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मोहपुर में पांच दिवसीय कोयापुनेम संस्कृति दर्शन का भव्य आयोजन 18 से 22 मई तक, गोंड़ी गाथाओं का होगा जीवंत प्रदर्शन

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कांकेर। गोंडवाना समाज कांकेर के तत्वावधान में बस्तर अंचल की पारंपरिक संस्कृति, अध्यात्म और पुरखों की गौरवशाली गाथाओं को पुनः जीवंत करने के उद्देश्य से पांच दिवसीय कोयापुनेम संस्कृति दर्शन (गोंड़ी गाथा) का आयोजन ग्राम मोहपुर जिम्मेदारी मंदिर, विकासखंड कांकेर, जिला उत्तर बस्तर कांकेर में किया जा रहा है। यह आयोजन 18 मई से 22 मई 2025 तक चलेगा। आयोजन में गोंड समाज के समस्त बंधु-बांधवों, जनजातीय संस्कृति में रुचि रखने वाले विद्वानों एवं जनमानस को सादर आमंत्रित किया गया है।

इस संस्कृति दर्शन कार्यक्रम में गोंड समाज की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं की विविध झलकियाँ प्रस्तुत की जाएँगी, जिसमें आदिवासी ज्ञान, लोकगाथा, और पुरखा परंपरा की सजीव व्याख्या की जाएगी। कार्यक्रम का प्रत्येक दिवस विशेष गाथाओं और प्रतीकात्मक कथाओं को समर्पित रहेगा:

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प्रथम दिवस 18 मई – जीव जगत की उत्पत्ति: इस दिन सृष्टि के आरंभ, जीव-जंतुओं, प्रकृति तत्वों और मानवीय अस्तित्व की उत्पत्ति से जुड़ी गोंड़ी दृष्टिकोणों को रेखांकित किया जाएगा।

द्वितीय दिवस 19 मई – पहांदी पारी एवं कुपार लिंगों की गाथा: इस दिन गोंड समाज के पवित्र पहाड़ी देवी-देवताओं की आराधना पद्धति और उनके प्रकट होने की गाथा का वर्णन होगा, जिनमें कुपार लिंगो की भूमिका प्रमुख रहेगी।

तृतीय दिवस 20 मई – काली कंकाली दाई की जन्म गाथा: इस दिन गोंड समाज की प्रमुख देवी काली कंकाली दाई की उत्पत्ति, शक्ति, और समाज रक्षण में उनकी भूमिका पर विस्तृत चर्चा होगी।

चतुर्थ दिवस 21 मई – 33 कोटी बच्चों की गाथा एवं गोत्र व्यवस्था: इस दिन गोंड समाज की गोत्र संरचना और 33 कोटि देवी-देवताओं की अवधारणा पर परंपरागत आख्यानों के माध्यम से प्रकाश डाला जाएगा।

पंचम दिवस 22 मई– शंभू मूला दाई विवाह गाथा एवं समापन: समापन दिवस पर गोंड देवी शंभू मूला दाई के विवाह प्रसंग की पौराणिक गाथा का आयोजन होगा, जिसमें सांस्कृतिक नाट्य, गीत और पारंपरिक वादन की प्रस्तुति होगी। इसी दिन समस्त कार्यक्रम का विधिवत समापन भी किया जाएगा।

गोंडवाना समाज जिला कांकेर द्वारा यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देगा, बल्कि युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य भी करेगा। यह आयोजन आदिवासी अस्मिता, आस्था और आत्म गौरव का प्रतीक बनकर उभरेगा।

संपर्क एवं आमंत्रण

सभी श्रद्धालु, संस्कृति प्रेमी, ग्रामीणजन एवं शोधार्थी इस भव्य आयोजन में सपरिवार सम्मिलित होकर गोंड संस्कृति के अनछुए पहलुओं से साक्षात्कार करें – इसी शुभकामना के साथ, जिला गोंडवाना समाज कांकेर ने आप सभी को सादर आमंत्रित किया है।….

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