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सावधान! पुलिस-CBI के नाम पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ का नया खेल, एक फोन कॉल और 22 लाख स्वाहा! जानें पूरी कहानी और अपनी सुरक्षा के उपाय !

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साइबर अपराधी अब ठगी के नए-नए तरीके इजाद कर रहे हैं, और ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम इन्हीं में से एक है जो तेजी से फैल रहा है। यह एक ऐसा खतरनाक जाल है जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को धमकाते हैं और उन्हें ‘गिरफ्तार’ होने का डर दिखाकर मोटी रकम ऐंठ लेते हैं। हाल ही में अंबिकापुर (छत्तीसगढ़) में एक सीआरपीएफ एसआई के साथ 22 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आने के बाद यह स्कैम फिर से सुर्खियों में है, जिसने इस खतरे की गंभीरता को बढ़ा दिया है।


 

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क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम?

 

‘डिजिटल अरेस्ट’ एक ऐसा तरीका है जहां अपराधी पीड़ितों को ऑनलाइन माध्यम से (वीडियो कॉल, ऑडियो कॉल) यह विश्वास दिलाते हैं कि वे किसी गंभीर अपराध (जैसे मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग तस्करी, बैंक फ्रॉड) में फंस गए हैं और उन्हें तुरंत ‘गिरफ्तार’ किया जा रहा है। वे पीड़ितों को डराते हैं कि उन्हें पुलिस स्टेशन या रिमांड होम में ले जाया जाएगा, और यह सब ऑनलाइन ही ‘कस्टडी’ में रहकर मैनेज करना होगा।

यह कैसे काम करता है:

पहला संपर्क: आपको एक अनजान नंबर से फोन या मैसेज आता है, जिसमें ठग खुद को कोई सरकारी अधिकारी (पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स ब्यूरो, बैंक अधिकारी) बताते हैं।

डर का माहौल: वे आपको बताते हैं कि आपके नाम पर कोई पैकेज मिला है जिसमें अवैध चीजें हैं (जैसे ड्रग्स, हथियार) या आपका बैंक अकाउंट किसी मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसा हुआ है। वे आपको धमकाते हैं कि आपके खिलाफ वारंट जारी हो गया है या आप गिरफ्तार होने वाले हैं।

वीडियो कॉल पर दबाव: इसके बाद वे आपको स्काइप, व्हाट्सएप या किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर वीडियो कॉल करने के लिए कहते हैं। कॉल पर, वे वर्दी में दिखते हैं (या पृष्ठभूमि में सरकारी ऑफिस जैसी जगह दिखाते हैं) और आपको एक ‘डिजिटल लॉक-अप’ में होने का नाटक करने को कहते हैं, जिसका मतलब है कि आपको अपने घर में ही किसी एकांत जगह पर रहना होगा और किसी से बात नहीं करनी होगी।

पैसे की मांग: ‘गिरफ्तारी’ से बचने या ‘जांच’ में सहयोग के नाम पर वे आपसे पैसे की मांग करते हैं। वे कहते हैं कि आपको अपना पैसा एक ‘सुरक्षित सरकारी अकाउंट’ में ट्रांसफर करना होगा ताकि आपकी ‘जांच’ हो सके और साबित हो सके कि आपका पैसा साफ है।

ब्लैकमेलिंग: वे आपको डराते हैं कि अगर आपने उनकी बात नहीं मानी तो आपको जेल हो जाएगी, आपका करियर खत्म हो जाएगा, या आपके परिवार को नुकसान होगा।


 

हालिया उदाहरण: अंबिकापुर के CRPF जवान के साथ ठगी

अंबिकापुर (छत्तीसगढ़) में एक सीआरपीएफ के सब-इंस्पेक्टर को इसी ‘डिजिटल अरेस्ट’ का शिकार बनाया गया। ठगों ने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर उन्हें यकीन दिलाया कि वे एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंस गए हैं। 17 दिनों तक, एसआई को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा गया, जिसका मतलब था कि उन्हें अपने घर में ही रहना था और किसी से संपर्क नहीं करना था। इस दौरान, ठगों के लगातार दबाव में, एसआई ने अपनी पत्नी के जेवर गिरवी रख दिए और अपने बेटे की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तोड़ दी, कुल मिलाकर 22 लाख रुपये गंवा दिए। जब उन्हें अहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।


 

कैसे बचें इस खतरनाक स्कैम से? (Precautions)

 

‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे घोटालों से बचने के लिए सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां दी गई हैं:

पहचान सत्यापित करें: यदि कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताता है, तो उसकी पहचान तुरंत सत्यापित करें। उनसे उनका पूरा नाम, विभाग और बैच नंबर पूछें। इसके बाद, उनकी ओर से दिए गए नंबर पर कॉल न करें, बल्कि संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से नंबर लेकर क्रॉस-चेक करें।

पैसे मांगने पर अलर्ट रहें: कोई भी सरकारी एजेंसी या बैंक कभी भी आपको फोन पर पैसे ट्रांसफर करने या व्यक्तिगत वित्तीय जानकारी (जैसे OTP, PIN, CVV) साझा करने के लिए नहीं कहेगा। अगर कोई ऐसा करता है, तो यह निश्चित रूप से एक घोटाला है।

दबाव में न आएं: स्कैमर्स अक्सर आपको डराने और जल्दबाजी में फैसला लेने के लिए दबाव डालते हैं। किसी भी दबाव या धमकी के आगे न झुकें। शांत रहें और स्थिति का मूल्यांकन करें।

निजी जानकारी साझा न करें: अपनी बैंक डिटेल्स, आधार नंबर, पैन नंबर, या कोई भी व्यक्तिगत जानकारी फोन या ऑनलाइन कभी साझा न करें।

वीडियो कॉल पर सावधान रहें: यदि कोई आपको ‘डिजिटल अरेस्ट’ के लिए वीडियो कॉल करने को कहता है, तो सतर्क हो जाएं। अपराधी अक्सर नकली वर्दी या पृष्ठभूमि का उपयोग करते हैं।

कानूनी सलाह लें: यदि आपको लगता है कि आप वास्तव में किसी कानूनी मुसीबत में हैं, तो सीधे अपने वकील या पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। किसी भी अनजान व्यक्ति की बातों पर भरोसा न करें।

रिपोर्ट करें: यदि आप ऐसे किसी भी स्कैम का शिकार होते हैं या आपको ऐसा कोई कॉल आता है, तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। छत्तीसगढ़ पुलिस भी ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज करने के लिए तत्पर है।

यह ध्यान रखें कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां कभी भी किसी को ‘डिजिटल’ तरीके से गिरफ्तार नहीं करतीं या पैसे की मांग नहीं करतीं। अपनी मेहनत की कमाई को बचाने के लिए जागरूक और सतर्क रहना बेहद ज़रूरी है।

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