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सरसींवा तहसील में डिजिटल इंडिया को लगा करारा झटका। जाति प्रमाण पत्र बनवाने भटक रहें हैं छात्र पालक।

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Digital India has suffered a major setback in Sarsiva tehsil. Students’ parents are wandering around to get their caste certificates made.

मुड़पार सरसींवा । केंद्र और राज्य सरकार का डिजिटल इंडिया बनाने का सपना था कि आम जनता को जरूरी सरकारी सेवाएं पारदर्शिता, सरलता के साथ उपलब्ध हो लेकिन इस समय लोगों को जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र के लिए यहां वहां भटकना पड़ रहा है जिससे सरकार का डिजिटल इंडिया खोखला साबित हो रहा है। इस समय सरसींवा तहसील कार्यालय की लापरवाही के चलते लोगों के जाति, निवास जैसे मूलभूत प्रमाणपत्रों के लिए च्वाइस सेंटर में जमा ऑनलाइन आवेदन को तहसील ऑपरेटर द्वारा जानबूझकर सेंड बैक किया जा रहा है और फिर प्रमाणपत्र स्वीकृति के बदले आवेदको से अवैध रकम की मांग की जा रही है। लोगों ने बताया कि एक साल पहले उक्त प्रमाण पत्र से उनके घर के अन्य सदस्य के प्रमाण पत्र आसानी से बने थे लेकिन इस सत्र में उसी दस्तावेज से प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है इससे विभाग के कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। थोड़ी भी त्रुटि से आवेदन खारिज हो रहे हैं या पेंडिंग में जा रहा है जिससे छात्र, पालक सब परेशान हैं। जानकारी के अनुसार 99 फीसदी ऑनलाइन आवेदन जानबूझकर मूल दस्तावेज़ के साथ उपस्थित होने, नये पटवारी प्रतिवेदन पेश करने जैसे बहाने बनाकर सेंड बैक कर दिए जाते हैं जबकि दस्तावेज़ पहले ही अपलोड किए गए होते हैं। इसके बाद आवेदक जैसे ही तहसील कार्यालय पहुंचता है वहां आवेदन स्वीकृति के नाम से पैसे वसूला जा रहा है। केवल आम नागरिक ही नहीं चॉइस सेंटर संचालक भी इस चक्रव्यूह में फंसे हुए है चॉइस सेंटर चलाने वाले ई-सेवा प्रदाता भी शोषण का शिकार हो रहे हैं। नियमों के तहत अगर सेंड बैक आवेदन पर 10 दिनों में प्रमाणपत्र नहीं बनता तो संबंधित चॉइस सेंटर को प्रति आवेदन ₹500 का जुर्माना भरना पड़ता है। इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिल रहा है जो फाइलें रोककर बाद में पैसे लेकर स्वीकृति दे रहे हैं। इस प्रकार की लापरवाही से अभी हाल ही में एसडीएम कार्यालय बिलाईगढ़ को 45 हजार रु की पेनाल्टी लगी है।

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इस समस्या से सबसे ज्यादा परेशान प्रवासी मजदूर और गरीब सबसे ज्यादा प्रभावित हैं लोग रोजी-रोटी के लिए राज्य से बाहर काम कर रहे हैं, उन्होंने चॉइस सेंटर में प्रमाणपत्र हेतु आवेदन किया था लेकिन अब उन्हें तहसील कार्यालय में मूल दस्तावेज़ जैसे वंश वृक्ष,मिशल,अधिकार अभिलेख, बी-1व राशनकार्ड के साथ उपस्थित होने बुलाया जा रहा है जो व्यक्ति हजारों किलोमीटर दूर कमाने गया है वो क्या सिर्फ एक प्रमाणपत्र के लिए वापस लौटेगा। इन सब के वजह से बच्चों की पढ़ाई में बाधा उत्पन्न हो रही। पालक नहीं होने पर बच्चो को प्रमाण पत्र के लिए स्कूल में कक्षाएं छोड़ कर तहसील कार्यालय जाना पड़ रहा है। जब सरकार डिजिटल इंडिया कहती है तो जनता को भरोसा होता है कि अब काम आसानी से होगा लेकिन सरसींवा तहसील में इस भरोसे को रोज कुचला जा रहा है यह सिर्फ लापरवाही नहीं यह जनता के अधिकारों का हनन है। मोहतरा निवासी एस कुमार ने जाति प्रमाण पत्र बनवाने आवेदन जमा किया है लेकिन अब तक नहीं बन पाया है जबकि इसी मिशल पर घर के अन्य कई सदस्यों के प्रमाण पत्र बने हैं दूसरे प्रकरण में पन्ड्रीपाली निवासी नंद कुमार बंजारे ने पुत्र जितेंद्र के जाति प्रमाण पत्र के लिए बीते माह 26 जून आवेदन जमा किए हैं अब तक उनका प्रमाण पत्र नहीं बना है।ऐसे ही और कई दर्जन आवेदकों के प्रमाण पत्र नहीं बन रहें हैं अंचल के लोगों ने शासन प्रशासन से अविलंब प्रमाण पत्र बनाने की मांग की है।इस संदर्भ में सरसींवा तहसील के तहसीलदार आयुष तिवारी ने बताया कि किसी की भी समस्या है वे तहसील कार्यालय आकर मुझे जानकारी दें तत्काल निराकरण किया जाएगा।

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