*पायलट प्रोजेक्ट के तहत कांकेर जिला चयनित*
उत्तर बस्तर कांकेर, 13 जुलाई 2025/ राज्य शासन द्वारा आदिवासी महिला किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए “दुधारू गाय वितरण योजना” संचालित की गई है, जिसका द्वितीय चरण कांकेर जिले के बड़गांव में संपन्न हुआ। जिले के बड़गांव (पखांजूर) में शनिवार 12 जुलाई को आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कांकेर सांसद श्री भोजराज नाग ने कहा कि आदिवासी वर्ग की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए दुधारू गाय वितरण योजना राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई है। उन्हें दुग्ध उत्पादन से जोड़कर समावेशी विकास की ओर अग्रसर किया जाएगा, जिससे वे समृद्ध हो सके। सांसद श्री नाग ने बधाई देते हुए महिला कृषकों को अपनी शुभकामनाएं दीं। इस दौरान अंतागढ़ विधायक श्री नाग ने भी ग्रामीणों को संबोधित किया।
इस योजना के तहत जिले की 75 आदिवासी महिला किसानों को दुधारू गायें प्रदान की गईं। कार्यक्रम का उद्देश्य आजीविका संवर्धन, पोषण सुधार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। उल्लेखनीय है कि योजना अंतर्गत चयनित आदिवासी महिला किसानों को सहीवाल नस्ल की 2-2 दुधारू गायें वितरित की जा रही हैं। यह पहल राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था एनडीडीबी डेयरी सर्विसेस के सहयोग से छत्तीसगढ़ राज्य दुग्ध महासंघ मर्यादित द्वारा संचालित की जा रही है।
राज्य सरकार इस योजना में 50 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है, जबकि 40 प्रतिशत राशि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के माध्यम से रियायती ब्याज दर पर ऋण स्वरूप प्रदान की जा रही है। शेष 10 प्रतिशत राशि लाभार्थियों द्वारा दी जाएगी। ऋण की वसूली किसानों के दूध विक्रय के माध्यम से की जाएगी।
लाभार्थियों को एक वर्ष तक मुफ्त सुविधाएं भी दी जाएंगी, जिसमें दुधारू गायों का बीमा, पशु स्वास्थ्य निगरानी, साइलेज चारा, पौष्टिक आहार, खनिज मिश्रण तथा वैज्ञानिक पशु प्रबंधन पर प्रशिक्षण शामिल हैं। साथ ही राज्य की पशु चिकित्सा टीमें नियमित रूप से पशु स्वास्थ्य सेवा एवं प्रजनन सुविधा भी उपलब्ध कराएंगी। इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट के तहत राज्य के छह जिलों कांकेर, कोंडागांव, महासमुंद, सारंगढ़, जशपुर एवं बलरामपुर में संचालित हो रही है। कांकेर जिले में सर्वाधिक 75 महिला किसानों को इस योजना से लाभान्वित किया गया।
यह योजना राज्य में समावेशी एवं सतत डेयरी विकास की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल है, जो आदिवासी अंचलों में आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव की नई इबारत लिख रही है।
इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, पशुपालन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी सहित हितग्राही और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद थे।




