Home Blog मलेरिया से जंग अब केवल इलाज की नहीं, यह रणनीति और जनसहभागिता...

मलेरिया से जंग अब केवल इलाज की नहीं, यह रणनीति और जनसहभागिता की लड़ाईः स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

0

The fight against malaria is no longer just a matter of treatment, it is a fight of strategy and public participation: Health Minister Shyam Bihari Jaiswal

छत्तीसगढ़ में मलेरिया पर करारा प्रहार

Ro.No - 13759/40

मिशन मोड में सरकार का अभियान, ‘शून्य मलेरिया’ की ओर बढ़ते कदम

रायपुर / स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के नेतृत्व में विभाग ने मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारी के स्थायी उन्मूलन के लिए एक बार फिर निर्णायक कदम उठाते हुए जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किया है। ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ के 12वें चरण ने न केवल अपने दायरे का विस्तार किया, बल्कि अपने प्रभाव से यह साबित कर दिया कि जब सरकार दृढ़ संकल्प के साथ काम करती है, तो नतीजे जमीन पर दिखाई देते हैं।

25 जून से जारी इस चरण के अंतर्गत राज्य के 10 जिलों में गहन जांच, उपचार और जनजागरूकता अभियान चलाया गया। अब तक 19,402 घरों का दौरा किया गया है और 98,594 लोगों की रक्त जांच की गई है। इनमें से 1,265 लोग मलेरिया पॉजिटिव पाए गए। सबसे अहम बात यह रही कि सभी संक्रमित व्यक्तियों को मौके पर ही दवा की पहली खुराक उपलब्ध कराई गई, वह भी पूरी सावधानी के साथ—पहले मरीजों को स्थानीय खाद्य पदार्थ खिलाया गया, ताकि दवा का प्रभाव सुरक्षित और प्रभावशाली रहे। प्रत्येक मरीज को उपचार कार्ड दिया गया है, ताकि फॉलोअप के जरिए पूरी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

इस अभियान का सकारात्मक असर सबसे अधिक बस्तर संभाग में देखा जा रहा है। 2015 की तुलना में यहां मलेरिया मामलों में 71 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। यह कोई सामान्य उपलब्धि नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित, सतत और वैज्ञानिक रणनीति का परिणाम है। राज्य का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) भी 27.40 से घटकर 7.11 तक आ गया है, जो दर्शाता है कि मलेरिया पर राज्य ने प्रभावी नियंत्रण पाया है।

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अभियान की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मलेरिया से जंग अब केवल इलाज की नहीं, यह रणनीति और जनसहभागिता की लड़ाई बन गई है। उनका मानना है कि सरकार ने जो लक्ष्य तय किया है—2027 तक ‘शून्य मलेरिया’ और 2030 तक ‘पूर्ण मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़’—उसे केवल दस्तावेज़ी नहीं, बल्कि यथार्थ के रूप में साकार किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की आयुक्त सह संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के प्रभाव से बस्तर संभाग में मलेरिया के मामलों में गिरावट आयी है। हर संक्रमित व्यक्ति तक पहुंचना, उसका समय पर इलाज करना और भविष्य में संक्रमण की कोई गुंजाइश न रहे यही हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हमारा फोकस लक्षणरहित मलेरिया मामलों पर है, ताकि बीमारी को जड़ से मिटाया जा सके।

इस अभियान की सफलता में मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, ग्राम पंचायतों और स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है। यह केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि अब एक जनआंदोलन बन चुका है। जांच और इलाज के साथ-साथ लोगों को मच्छरदानी के नियमित उपयोग, जलजमाव की रोकथाम और साफ-सफाई जैसे व्यवहारिक उपायों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ सरकार का यह ठोस और संवेदनशील प्रयास न केवल राज्य को मलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में मजबूत कदम है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर भी एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। आने वाले वर्षों में यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here